तरुण आहूजा
नित्य संदेश, मेरठ: एक ओर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद
हर तरफ दहशत का माहौल है, वहीं दूसरी ओर शास्त्री नगर में खुलेआम नए अवैध निर्माण होते
नजर आ रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाया जा
रहा हो। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माणकर्ता कहते हैं कि “जेई और एई से सेटिंग
हो गई है, कोई दिक्कत नहीं होगी।” यदि स्थिति पर नजर डाली जाए तो किसी भी नए अवैध निर्माण
पर प्रभावी कार्रवाई होती नहीं दिख रही। इससे सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कहीं
न कहीं “सेटिंग” का खेल तो नहीं चल रहा?
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, आखिर क्यों?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी बन रहे अवैध निर्माणों
की शिकायत संबंधित जेई से की जाती है, तो जवाब मिलता है— “बाबू को भेजा था, काम रुकवा
दिया”, “एई साहब को बता दिया है, कार्यवाही होगी” या “नोटिस लग जाएगा।” लेकिन सवाल
यह है कि 661/6 पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई के बाद अधिकारियों के तबादले हुए, नए जेई और
एई आए, फिर भी बीते 6 महीनों में किसी एक अवैध निर्माण पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं
हुई?
(1) जे-36 का मामला
स्थानीय लोगों के अनुसार, जेई ऋषभ का जवाब अक्सर यही होता
है कि “कार्यवाही एई साहब करेंगे, नोटिस भेज दिया गया है।” लेकिन सवाल उठता है कि क्या
जिम्मेदारी सिर्फ कार्यालय में बैठकर कागजी प्रक्रिया तक सीमित है?
(2) 651/6 पर आदेश के बाद भी सन्नाटा:
अनाधिकृत निर्माण गिराने के आदेश और समय सीमा समाप्त होने
के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि हर बार सिर्फ “कार्यवाही
होगी” कहकर मामला टाल दिया जाता है।
(3) जेई इंद्रसेन पर भी सवाल
जेई इंद्रसेन को क्षेत्र में आए छह महीने से अधिक हो चुके
हैं। अवैध निर्माणों की सूची होने के बावजूद किसी एक निर्माण पर कार्रवाई नहीं हुई।
आरोप यह भी है कि जानकारी मांगने पर जवाब मिलता है— “जानकारी नहीं है।” ऐसे में सवाल
उठता है कि यदि क्षेत्र में हो रहे निर्माणों की जानकारी संबंधित अधिकारी को नहीं,
तो आखिर किसे होगी?
सेक्टर 1 से 13 तक ‘चमन’ और ‘मुमताज’ के नाम चर्चाओं में
शास्त्री नगर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों
के अनुसार, चाहे निर्माण 30 साल पुराना हो या तीन महीने पुराना, दो नाम बार-बार सामने
आते हैं— चमन और मुमताज। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन
सवाल यह जरूर उठ रहा है कि यदि चर्चाएं इतनी व्यापक हैं तो संबंधित विभाग कार्रवाई
क्यों नहीं कर रहा? आखिर बन रहे निर्माणों पर कार्यवाही कब ये अभी भी एक सवाल है जिसका
जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं!

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