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तरुण आहूजा
नित्य संदेश, मेरठ। दिल्ली में हालिया होटल अग्निकांड के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की फायर सेफ्टी जांच के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद मेरठ में 300 से ज्यादा होटलों में से अब तक लगभग 60 से 65 होटलों की ही जांच हो पाना कई सवाल खड़े करता है।
राज्य स्तर पर हालिया अग्निकांड के बाद विशेष जांच अभियान
चलाने के निर्देश दिए गए थे। बताया जा रहा है कि सिर्फ नौचंदी थाना क्षेत्र में ही
35 से ज्यादा होटल संचालित हैं, जिनमें से कई जगहों पर पर्याप्त अग्निशमन यंत्र तक
मौजूद नहीं हैं। ऐसे में यदि कहीं आग जैसी घटना हो जाए तो भारी जान-माल का नुकसान होने
की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी
और नियमित जांच की कमी भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। सवाल यह है
कि क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी घटना के बाद ही पूरी तरह सक्रिय होंगे, या समय रहते
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा? अगर फायर सेफ्टी उपकरण नहीं, आपातकालीन निकास
व्यवस्था कमजोर और कर्मचारियों को प्रशिक्षण नहीं मिला, तो एक छोटी चूक भी बड़े हादसे
में बदल सकती है। हाल के निरीक्षण अभियानों में कई शहरों में ऐसी कमियां सामने आई हैं।
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