नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। प्रांतीय शासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग एवं इंदौर जिले के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को उच्च शिक्षा मंत्री इन्दरसिंह परमार को अपनी लंबित मांगों को पूरा करने के लिए ज्ञापन सौंपा।
इसमें उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षको, क्रीड़ा अधिकारियों एवं ग्रंथपालों की कई मांगों को लेकर प्रतिनिधि मंडल प्रांतीय शासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ के अंतर्गत इंदौर संभागीय अध्यक्ष डॉ. मंजु शर्मा के नेतृत्व में इंदौर के विविध महाविद्यालयों के प्राध्यापकों द्वारा ज्ञापन दिया गया जिसमें प्रमुख मांगे- वर्ष 2004-05 में नियुक्त बैकलॉक सहायक प्राध्यापकों की परीविक्षा अवधि नियुक्ति दिनांक से 2 वर्ष पश्चात् समाप्त कर उन्हे केरियर प्रोउन्नति का लाभ दिया जाये तथा जिन सहायक प्राध्यापकों ने अभी योग्यता अर्जित नही की है उन्हे वर्ष 2028 तक योग्यता अर्जित करने का अवसर प्रदान किया जायें। क्रीडा अधिकारियों एवं ग्रंथपालों को सहायक प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक तथा प्राध्यापक पदनाम दिया जायें तथा उनकी सेवा निवृति की आयु में वृद्धि कर 65 वर्ष की जाये और उन्हे यू.जी.सी के प्रावधानुसार पे-मेट्रिक्स-14 का लाभ दिया जाये। वर्ष 2009, 2011 एवं 2019 में नियमितिकरण से वंचित सहायक प्राध्यापकों की परीविक्षा अवधि समाप्त की जाये तथा उन्हे कैरियर एडवांसमेन्ट का लाभ शीघ्र प्रदान किया जाये। छानबीन की समिति की बैठक प्रति सप्ताह एवं विषयवार आयोजित की जाये , यू.जी.सी द्वारा ओरियन्टेशन एवं रिफ्रेशर की समय-सीमा वर्ष 2023 तक बढाई गई हैं उसे मान्य करते हुए उक्त अवधि में उन समस्त सहायक प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक तथा प्राध्यापकों को नियत तिथि से वेतनमान एवं पदनाम दिया जाये. सहायक प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक को पात्रतानुसार सह-प्राध्यापक एवं प्राध्यापक पदनाम दिया जायें।
शासन द्वारा डिप्लायमेन्ट किये गये सहायक प्राध्यापक,सह-प्राध्यापक एवं प्राध्यापकों का डिप्लायमेन्ट समाप्त किया जायें। सेवा निवृत शिक्षको की पेंशन, वेतन निर्धारण, अर्जित अवकाश एवं समूह बीमा भुगतान को प्राथमिकता दी जाये।. सामान्य प्रशासन विभाग के नियमानुसार परामर्शदात्री की बैठक शीघ्र आयोजित की जाये उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विगत 10 वर्षो से परामर्शदात्री की बैठक आयोजित नही की गई है।
शासन द्वारा डिप्लायमेन्ट किए सहायक प्राध्यापक प्राध्यापक का डिप्लायमेन्ट समाप्त किया जाय । गोरतलब है कि उच्च शिक्षा विभाग में 2004.05 में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित सहायक प्राध्यापक विभिन्न परेशानियों से जूझ रहे हैं. मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने दो वर्ष के भीतर पीएचडी, नेट, एमपी सेट करने की शर्त पर भर्ती की गई थी किन्तु उस अवधि में लगभग अट्ठारह प्रतिशत प्रोफेसर्स ने आवश्यक योग्यता अर्जित कर ली है और उन्हें कुछ लाभ भी मिल गए है और कुछ बाकी है। दो वर्ष के बाद 2017 से पूर्व तक सड़सठ प्रतिशत प्रोफेसर्स की परीविक्षा अवधि समाप्त हो गई है किन्तु उनमें से सौ प्रतिशत प्रोफेसर्स के फोर्थ पे बेंड, प्रमोशन बाकी है, वरिष्ठ वेतनमान उन साठ प्रतिशत को मिला चौबीस प्रतिशत प्रोफेसर्स कों वरिष्ठ नहीं मिला, छियासी प्रतिशत प्रोफेसर्स के प्रवर वेतनमान बाकी है केवल चौदह प्रतिशत प्रोफेसर्स कों प्रवर वेतनमान मिला है। जिन्होंने 2017 के बाद पीएचडी, नेट, एमपी सेट एक्जाम उत्तीर्ण की है उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्त होना बाकी है अर्थात जिनकी परिवीक्षा अवधि समाप्त नहीं हुई है वह मूल वेतन के साथ डी.ए. पर आश्रित है आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हो चूके हैं, उनके अपने बच्चों के करियर कमजोर हो रहें हैं,और स्वयं उम्र के ऐसे पड़ाव पर आ चुके हैं कि जॉब के साथ अन्य कार्य भी नहीं कर पाते हैं, समाज की नजरों में प्रोफेसर्स है किन्तु परिवीक्षा अवधि समाप्त नहीं होने के कारण आर्थिक स्थिति दयनीय है, समाज के साथ साथ घर परिवार के सदस्यों कों भी ऐसे प्रोफेसर्स के प्रति सभी उम्मीदें समाप्त हो गई है, हालात यहां तक हों गए हैं कि एक प्रायमरी स्कूल टीचर की सैलरी हमारे से ज्यादा है ऐसे स्थिति में अपने आप में मानसिकता प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं। बदकिस्मती ऐसी रहीं कि 2005 से 2017 के बीच एम. पी. सेट परीक्षा मध्यप्रदेश सरकार ने आयोजित नहीं करवाई जो कि नेट एक्जाम से कुछ सरल होती है शायद सभी समय सीमा में शर्तें पूर्ण हो जाती, अधिकांश साइंस के प्रोफेसर्स बाकी है जिनकी परिवीक्षा अवधि समाप्त नहीं हुई है कारण दूरस्थ कालेजों में पोस्टिंग, अधिकांश कालेजों में सिंगल डिपार्टमेंट, पीएचडी के लिए आसानी से गाइड नहीं मिलना, कालेज की सौंपी गई जिम्मेदारियों का निर्वहन करना, अवकाश ठीक से न मिल पाना, आर्थिक रूप से कमजोर होना ।
साइंस में नेट एक्जाम टप पड़ना ऐसे कई कारण रहें जिसकी वज़ह से प्रोफेसर्स स्वयं दुर्दशा के शिकार हुए हैं। पहले से क्या पता था कि हमारी वैकेंसी के दूरस्थ परिणाम बेहद घातक होंगे और समय बदलनें के साथ नियम भी बदल दिए जाएंगे जैसे आवश्यक योग्यता 2017 से पहले कभी भी अर्जित की है किन्तु निर्धारित दो वर्ष के आधार पर परिवीक्षा अवधि समाप्त की किन्तु अन्य अधिकांश लाभों से वंचित कर दिए,दूसरा कुछ प्रोफेसर्स के आवश्यक योग्यता अर्जित करने के तिथि से परिवीक्षा अवधि समाप्त की गई,तीसरा यह कि 2017 के बाद आवश्यक योग्यता अर्जित करने के बाद भी उच्च शिक्षा विभाग पर जूं तक नहीं रेंगती। इस सम्बन्ध में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व शिक्षा मंत्री से कई बार अनुरोध के साथ कई प्रोफेसर्स मिल चुके हैं आश्वासन हमेशा ही सराहनीय व सकारात्मक मिले किन्तु रिजल्ट शून्य मिला और वही शून्य लेकर 2004-05 के प्रोफेसर्स अपने शेष कामों को लेकर दर दर भटक रहा है और निवेदन, ज्ञापन नामक भीख का कटोरा लेकर जन प्रतिनिधियों के आगे पीछे चक्कर लगा रहा है। यह जानकारी इन्दौर जिले के उपाध्यक्ष डॉ.जी.आर. मोरे ने दी है।


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