नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। मेरठ की साहित्यिक और रंगमंचीय गतिविधियों को देखते हुए हमने यह संकल्प लिया है कि मेरठ को ‘नाट्य नगरी’ बनाएँगे। जिस प्रकार मेरठ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, खेल, शिक्षा, चिकित्सा, कैंची और सूती वस्त्रों आदि के लिए प्रसिद्ध है, उसी प्रकार आने वाले दिनों में मेरठ को नाटक के क्षेत्र में भी याद किया जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि नए-नए पात्रों और नए-नए विषयों पर नाटक प्रस्तुत करके मेरठ की जनता को नाटक की महत्ता एवं उपयोगिता से परिचित कराया जाए।
ये विचार प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक तथा मेरठ आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. असलम जमशेदपुरी ने प्रेमचंद सेमिनार हॉल में आयोजित कार्यक्रम ‘जश्न-ए-कामयाबी’ में अपने अध्यक्षीय संबोधन के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि मेरठ की नई नाट्य संस्था ‘मेरठ आर्टिस्ट एसोसिएशन’ प्रेमचंद की विचारधारा का बेहतरीन प्रतिनिधित्व कर रही है। आज देश को सामाजिक भाईचारे की नींव को मजबूत करने के लिए ऐसे मिशन की आवश्यकता है, जो सामाजिक कल्याण और सहिष्णुता को बनाए रखने में सहायक सिद्ध हो सके। हमारा उद्देश्य होना चाहिए कि समाज में ऐसे विचारों और सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार हो, जिससे लोगों के मस्तिष्क के बंद द्वार खुलें और भारत के विशाल आंगन में शांति एवं भाईचारे का वृक्ष फले-फूले। मुझे आशा है कि यह संस्था इस मिशन को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि हाल ही में मंचित नाटक ‘गोरखधंधा’ को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके सभी कलाकार, विशेष रूप से निर्देशक अनिल शर्मा और नाटक के संयोजक विनोद कुमार बेचैन, बधाई के पात्र हैं। मैं सभी कलाकारों को हृदय से बधाई देता हूँ।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. इरशाद सियानवी ने नाटक के कलाकारों का पुष्पों के माध्यम से स्वागत करके किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक प्रो. असलम जमशेदपुरी ने की। कार्यक्रम का संचालन राशिद यूसुफ ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आसिफ अली ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर नाटक के निर्देशक अनिल शर्मा तथा संयोजक विनोद कुमार बेचैन को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद विनोद कुमार बेचैन ने कहा कि हम उर्दू विभाग के सदस्यों के आभारी हैं, जिन्होंने नाटक की शानदार सफलता के बाद ‘जश्न-ए-कामयाबी’ का आयोजन कर हमारा उत्साहवर्धन किया। हमें धरती पर चलते हुए आकाश पर नजर रखनी चाहिए, तभी हम सफल होंगे। भविष्य में भी हम इससे बेहतर कार्य करने का प्रयास करेंगे।इस अवसर पर अनिल शर्मा ने भी उर्दू विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
उल्लेखनीय है कि प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर तथा प्रसिद्ध रंगमंच कलाकार स्वर्गीय सुरेन्द्र शर्मा की स्मृति में प्रसिद्ध नाटककार जयवर्धन द्वारा लिखित नाटक ‘गोरखधंधा’ का मंचन विश्वविद्यालय के अटल सभागार में किया गया था। नाटक का निर्देशन अनिल शर्मा ने किया था। दर्शकों ने नाटक को बेहद पसंद किया। पूरे नाटक के दौरान सभागार दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। नाटक के सभी कलाकारों ने शानदार अभिनय का प्रदर्शन किया।
यदि पर्दे के पीछे के कलाकारों की बात की जाए तो मेकअप आर्टिस्ट आबिद सैफी ने शानदार कार्य किया। इसी प्रकार जितेंद्र सी. राज द्वारा की गई प्रकाश व्यवस्था और संगीत भी प्रभावशाली रहा। नाटक की सफलता का श्रेय इसके संयोजक विनोद कुमार बेचैन को जाता है, जिन्होंने नाटक को सफल बनाने के लिए अथक परिश्रम किया। कार्यक्रम में डॉ. शादाब अलीम, डॉ. अलका वशिष्ठ, हेमंत गोयल, रुपाली गुप्ता, शहजाद, फैजान यासीन, अतहर खान, शाह ए ज़मन, फरहत अख्तर, मोहम्मद शमशाद, मोहम्मद शाहवेज, मोहम्मद इमरान, आबिद सैफी, साजिद सैफी, सईद अहमद सहारनपुरी आदि उपस्थित रहे।

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