मयंक अग्रवाल
नित्य संदेश, मेरठ। राधा गोविंद मंडप में सप्त दिवसीय सत्संग के विश्राम दिवस पर पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती महाराज ने श्रोताओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास महाराज ने वाल्मीकि रामायण का आधार बनाकर, अध्यात्म रामायण का सिद्धांत लेकर रामचरितमानस की रचना की। जैसे महाभारत में 18 गीताएं हैं, वैसे ही रामायण में 7 गीताएं हैं। स्वामी जी ने कहा, ज्ञान पुरुष तंत्र है और भक्ति कृपा तंत्र है। गरुड़ गीता में उनके सप्त प्रश्नों के उत्तर का प्रसंग विस्तृत रूप से वर्णन किया गया है।
गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं सबसे बड़ा दुख दरिद्रता और सबसे बड़ा सुख संतों का मिलना। इस जगत में दरिद्रता से बढ़कर कोई दुख नहीं है। उदाहरण देते हुए स्वामी जी ने बताया कि संत नारियल जैसा है - ऊपर से कठोर, अंदर से सात्विक और कोमल। नारियल का फल सात्विक है, इसलिए देवताओं पर चढ़ता है। कभी किसी की निंदा न करें। इस अवसर पर मनोज कुमार गुप्ता, बबीता गुप्ता, गोविंद अग्रवाल, आर के प्रसाद, मयंक अग्रवाल आदि अनेक भक्तजन उपस्थित रहे। यजमान मनोज कुमार गुप्ता ने बताया कि 19 अगस्त 2026 को सायं 4 बजे से ला फ्लोरा में गोस्वामी तुलसीदास जयंती का पर्व मनाया जाएगा। अंत में आरती और सभी को प्रसाद वितरण किया गया। प्रातः काल में 8 से 9 बजे तक विषय - विवेक चूड़ामणि, स्थान - सुमित्रा सत्संग भवन, जागृति विहार एक्सटेंशन पर सत्संग 13 अगस्त से 19 अगस्त तक होगा।

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