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Sunday, August 2, 2026

एक महीने पहले गूंजी थीं शहनाइयां, अब तिरंगे में लौटा बेटा, कांपते हाथों से दी श्रद्धांजलि, सीने से लगाया तिरंगा

• इंदौर में मेजर हमजा आरिफ को अंतिम विदाई, पत्नी के आंसुओं ने हर आंख की नम


नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। शहर ने आज एक ऐसा मंजर देखा, जिसने हर आंख को नम कर दिया। जैसलमेर में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले मेजर हमजा आरिफ को आज पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, लेकिन इस विदाई के दो पल ऐसे रहे, जिन्होंने हर किसी को भावुक कर दिया।

सुबह करीब नौ बजे सैफी नगर में जनाजे की नमाज अदा की गई। इसके बाद सेना के वाहन में तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर अंतिम यात्रा के लिए रवाना हुआ। अंतिम यात्रा सैफी नगर से माणिकबाग पुल, कलेक्टर चौराहा, राजबाड़ा और सदर बाजार होते हुए इमली बाजार स्थित शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंची।

पत्नी ज्योति अरोरा ने कांपते हाथों से अपने पति को अंतिम श्रद्धांजलि दी। पति को आखिरी बार विदा करते हुए वह खुद को संभाल नहीं सकीं और फूट-फूटकर रो पड़ीं।

उस दर्द भरे पल में उनकी मां ने उन्हें गले लगाकर संभाला। वहीं गार्ड ऑफ ऑनर के बाद जब सेना ने वह तिरंगा उनकी पत्नी को सौंपा, जिसमें लिपटकर मेजर का पार्थिव शव इंदौर पहुंचा था, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शव अंतिम यात्रा के साथ इमली बाजार स्थित शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंचा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

सेना के जवानों ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर

सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी अधिकारी को अंतिम सलामी दी. इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार, उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम यात्रा में राजस्थान और मध्य प्रदेश से पहुंचे सेना के कई अधिकारी, जिनमें कर्नल, लेफ्टिनेंट और मेजर रैंक के अधिकारी भी शामिल थे. बड़ी संख्या में बोहरा समाज के लोग, शहरवासी और परिजन अपने वीर बेटे को अंतिम विदाई देने पहुंचे। हर आंख नम थी और हर चेहरा मेजर हमजा आरिफ की यादों में डूबा नजर आया।

सबसे भावुक पल तब आया, जब पत्नी ज्योति अरोरा ने अपने पति को अंतिम श्रद्धांजलि दी। वह खुद को संभाल नहीं सकीं और फूट-फूटकर रो पड़ीं। उस दौरान उनकी मां ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाया। इसके बाद सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर के पश्चात राष्ट्रीय ध्वज उनकी पत्नी को सौंपा। तिरंगे को सीने से लगाकर खड़ी पत्नी की आंखों में पति को खोने का गहरा दुख था, लेकिन उसी तिरंगे में अपने सैनिक पति के प्रति गर्व भी साफ दिखाई दे रहा था।

कर्तव्य के प्रति पूरी तरह समर्पित थे मेजर हमजा

मेजर हमजा आरिफ को जानने वाले बताते हैं कि वह बेहद सरल, मिलनसार और अपने कर्तव्य के प्रति पूरी तरह समर्पित अधिकारी थे। उनकी असमय मौत ने परिवार, दोस्तों और पूरे शहर को गहरा सदमा दिया है। मेजर हमजा आरिफ अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका कर्तव्य, अनुशासन और देशसेवा का जज्बा हमेशा लोगों की यादों में जिंदा रहेगा। पूरे सैन्य सम्मान के साथ इंदौर ने आज अपने इस वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

कब्रिस्तान में सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया और अपने साथी अधिकारी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

एक महीने पहले हुआ था विवाह

अंतिम विदाई का सबसे भावुक पल तब आया, जब पत्नी ज्योति अरोरा अपने पति को आखिरी श्रद्धांजलि देने पहुंचीं। कांपते हाथों से उन्होंने तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को नमन किया, लेकिन खुद को संभाल नहीं सकीं और फूट-फूटकर रो पड़ीं। उनकी मां ने उन्हें गले लगाकर संभाला। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सेना के अधिकारियों ने वह तिरंगा पत्नी ज्योति अरोरा को सौंपा, जिसमें लिपटकर मेजर हमजा आरिफ अपने घर लौटे थे। उन्होंने तिरंगे को सीने से लगा लिया।


अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार में राजस्थान और मध्य प्रदेश से सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे। कर्नल, लेफ्टिनेंट और मेजर रैंक के अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में बोहरा समाज के लोग, शहरवासी, रिश्तेदार और मित्र भी मौजूद रहे। हर कोई अपने वीर बेटे को नम आंखों से विदाई देता नजर आया।


परिजनों ने बताया कि मेजर हमजा आरिफ का विवाह करीब एक महीने पहले ही हुआ था। शादी के बाद वह कुछ दिन की छुट्टी बिताकर वापस ड्यूटी पर लौटे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि नई जिंदगी की शुरुआत के कुछ ही दिनों बाद वह तिरंगे में लिपटकर घर लौटेंगे।

सेना के वाहन से टकराया था ऊंट 

गौरतलब है कि गुरुवार देर रात राजस्थान के जैसलमेर जिले में यह हादसा हुआ था। मेजर हमजा आरिफ अपने दो साथी अधिकारियों के साथ ड्यूटी पूरी कर सेना की टाटा सफारी से सैन्य स्टेशन लौट रहे थे। थईयात सैन्य क्षेत्र के पास अचानक एक ऊंट सड़क पर आ गया। वाहन ऊंट से टकराकर अनियंत्रित हो गया और कई बार पलटते हुए काफी दूर तक घिसटता चला गया। 

हादसे में मेजर हमजा आरिफ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद दो लेफ्टिनेंट गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका इलाज सैन्य अस्पताल में जारी है। हादसे में ऊंट की भी मौत हो गई।

31 वर्षीय मेजर हमजा आरिफ पिछले नौ वर्षों से भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे थे। उनके पिता आरआर कैट से सेवानिवृत्त हैं। परिवार में माता-पिता और तीन बहनें हैं। उनकी असमय मौत से सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा इंदौर शोक में डूबा हुआ है।

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