
• दिल्ली में ‘मालव गाथा’ का विमोचन, मालवा की संस्कृति को मिला काव्यात्मक दस्तावेज
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। राऊ निवासी एवं सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि अतुल ज्वाला की रचना ‘मालव गाथा’ का विमोचन नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के शासकीय आवास पर गरिमामय समारोह में हुआ। घनाक्षरी छंदमाला शैली में रचित यह कृति मालवा की बोली-भाषा, लोक-संस्कृति, परंपराओं, खान-पान, कला, तीर्थस्थलों, नगर-कस्बों और इस अंचल से जुड़ी विभूतियों को काव्य के माध्यम से सहेजती है।
विमोचन समारोह में मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, इंदौर सांसद शंकर लालवानी, राज्यसभा सांसद डॉ. कविता पाटीदार, शिवनारायण डिंगू और हेमचंद्र मित्तल सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
अपनी माटी पर गर्व कराएगी कृति : बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कवि अतुल ज्वाला के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ‘मालव गाथा’ पाठकों, विशेषकर मालवा के लोगों को अपनी माटी और संस्कृति पर गर्व की अनुभूति कराएगी। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति को छंदबद्ध कर भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का यह प्रयास सराहनीय है।
मालवा का सांस्कृतिक दस्तावेज : विजयवर्गीय
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि ‘मालव गाथा’ केवल काव्य संग्रह नहीं, बल्कि मालवा का सांस्कृतिक दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि यह कृति आने वाली पीढ़ियों, साहित्य प्रेमियों और शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ साबित होगी।
मालवा की आत्मा को शब्दों में संजोया
राज्यसभा सांसद डॉ. कविता पाटीदार ने इसे मालवा की आत्मा का जीवंत दस्तावेज बताया, जबकि इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि यह पुस्तक मालवा वासियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करेगी।
मालवा के विविध रंगों की गाथा
‘मालव गाथा’ में मालवी बोली-भाषा, लोक कला, पहनावा और खान-पान के साथ अंचल के प्रमुख तीर्थ एवं पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक नगरों-कस्बों तथा मालवा की धरती से जुड़ी महान विभूतियों और जननायकों के योगदान को घनाक्षरी छंदों में प्रस्तुत किया गया है। कृति के माध्यम से कवि अतुल ज्वाला ने मालवा की सांस्कृतिक पहचान और लोक जीवन को साहित्य के स्थायी दस्तावेज के रूप में सहेजने का प्रयास किया है।
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