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Friday, August 14, 2026

आने वाली पीढ़ियों को विभाजन के बारे में बताना हमारी जिम्मेदारी - कैलाश विजयवर्गीय

• विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर भाजपा का मौन जुलूस 

 

नवीन मौर्य 

नित्य संदेश, इंदौर। भारतीय जनता पार्टी महानगर इंदौर द्वारा आज 14 अगस्त को  विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, नगर प्रभारी राजेश सोलंकी, सांसद शंकर लालवानी, महापौर  पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला, विधायक महेंद्र हार्डिया जी, विधायक मधु वर्मा, विधायक गोलू शुक्ला, विधायक मालिनी गौड़, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता की उपस्थिति में मौन जुलूस निकाला गया एवं संगोष्ठी सम्पन्न हुई। 

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का निर्णय लिया है। 14 अगस्त देश का वह काला दिन है, जब देश में एक तरफ आजादी का जश्न मनाया जा रहा था तो दूसरी ओर चित्कार और विभाजन का दर्द था इसे भूलना नहीं चाहिए। 14 अगस्त को भारत माता ने  जो दर्द सहा है उसे हमें भूलना नहीं चाहिए। 


श्री विजयवर्गीय ने कहा 1929 में रावी के तट पर कॉंग्रेस के सभी नेताओं ने सम्पूर्ण स्वराज की कसम खाई थी, वो रावी का तट हमारे पास है क्या? पंजाब जो पांच नदियों से मिलकर बना था वो पांच नदिया है क्या? अंग्रेजो की फुट डालो और शासन करो की राजनीति का शिकार जिन्ना हो गए। लेकिन अफ़सोस इस बात का है कि सम्पूर्ण आजादी मिली क्या? इतने बड़े राष्ट्र का विभाजन हुआ, 15 अगस्त को झंडा वंदन हुआ तब भी किसी को यह नहीं पता था कि विभाजन की सीमा रेखा क्या होगी। भारत का विभाजन बंद कमरे में बैठकर तय हुआ, तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंग देश को बचाने के लिए आंदोलन किया, आज जो आधा कश्मीर और आधा बंगाल हमारे पास है उसका श्रेय डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को जाता है। विभाजन में जो दर्द लोगों ने झेला है, उसे आने वाली पीढ़ी को बताना चाहिए, यह हम सभी जिम्मेदारी है। ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। 

आरएसएस के वरिष्ठ नेता ईश्वर हिंदुजा ने कहा कि विभाजन में लोगों ने आत्म बलिदान भी किया, कई महिलाओ ने अपनी अस्मत बचाने के लिए कुओं में कूद कर अपनी जान दे दी। कई लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को जहर की पुड़िया दी थी कि अगर ऐसा समय आ जाए तो जहर की पुड़िया खाकर अपना जीवन समाप्त कर लेना लेकिन असुरों के हाथों में मत आना जो बच्चों और महिलाओ की निर्ममता पूर्वक हत्या कर रहे थे। बच्चों को भाले पर लटकाकर हत्या की जा रही थी, आप सोच सकते हैं कि य़ह सिर्फ विभाजन नहीं था बल्कि वीभत्स अत्याचार था, नृशंस और अमानवीय अत्याचार था। 


वरिष्ठ समाजसेवी अजित सिंह नारंग ने कहा कि 2021 को हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विभाजन विभीषिका मनाने की घोषणा की, ताकि उन लाखों निर्दोष लोगों को जिनका कोई कसूर नहीं था, मौत के घाट उतार दिया गया, उनको श्रद्धांजलि दी जा सके, और दुनिया को संदेश दिया जा सके, कि यह धर्मान्धता, कट्टरता, अलगाववाद कितना खतरनाक होता है। 

उन्होंने कहा कि यह विभाजन भौगोलिक विभाजन नहीं था, यह लोगों के दिल में बसे प्रेम प्यार, स्नेह भावनाओं का विभाजन था, यह किसी देश का विभाजन नहीं था, यह मानवता का मानव सभ्यता का सबसे बड़ा विभाजन था। यह हमारे देश की सुसंस्कृत संस्कृति का विभाजन था। यह वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा का विभाजन था। 


संगोष्ठी से पूर्व अतिथियों ने भाजपा कार्यालय पर विभाजन की विभीषिका की प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। मौन रैली में महिलाएं विरोध स्वरुप काले वस्त्रों में शामिल हुई। कार्यकर्ता हाथों में विभाजन के विरोध की तख्तियां भी लेकर चल रहे थे।

इस अवसर पर अजय जी, प्रीतपाल सिंह भाटिया, सूरज केरो, प्रताप राजोरिया, अंजू माखीजा, मुद्रा शास्त्री, आलोक दुबे, दीपक जैन टीनू, सुधीर कोल्हे, महेश कुकरेजा, कैलाश पीपले, राकेश शर्मा, वासुदेव पाटीदार, भूपेंद्र सिंह केसरी, भारत पारख, दीपेन्द्र सिंह सोलंकी, दीप्ति हाडा, नेहा शर्मा, सचिन बंसल, विशाल यादव, वरुण पाल, हेमराज वाडिया, गोविंद पंवार, दीपांश खण्डेलवाल, राजा कोठारी सहित मंडल  अध्यक्ष एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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