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Saturday, August 15, 2026

एडीजी जोन और एसटीएफ फील्ड यूनिट ने शहीद सुनील कुमार के घर पहुंचकर परिवार का बढ़ाया हौसला

नित्य संदेश ब्यूरो 
इंचौली: कर्तव्य पथ पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले माँ भारती के वीर सपूत, कीर्ति चक्र से सम्मानित शहीद इंस्पेक्टर सुनील कुमार के परिवार से मिलने के लिए एडीजी के नेतृत्व में एसटीएफ फील्ड यूनिट मेरठ की पूरी टीम उनके पैतृक गांव मसूरी पहुंची।

अधिकारियों ने शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और शहीद की माता अतरकली देवी, पत्नी मुनेश देवी, पुत्र मंजीत काकरान, पुत्री नेहा और बड़े भाई अनिल कुमार चौधरी से भेंट कर उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। एडीजी जोन ने कहा कि "शहीद सुनील कुमार का बलिदान पूरे पुलिस विभाग के लिए प्रेरणा है। यह परिवार अकेला नहीं है, पूरा विभाग और शासन हर सुख-दुख में इनके साथ खड़ा है।"

कौन थे शहीद सुनील कुमार?
मूल रूप से इंचौली थाना क्षेत्र के मसूरी गांव निवासी सुनील कुमार पुत्र स्व. चरण सिंह 1 सितंबर 1990 को उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। एसटीएफ के गठन के बाद उन्होंने 1997 में मानेसर, हरियाणा में कमांडो कोर्स किया था। 2009 से वह लगातार यूपी एसटीएफ में थे और 16 साल तक एसटीएफ में सेवाएं दीं।  

20 जनवरी की रात शामली के झिंझाना क्षेत्र में एक लाख के इनामी कग्गा गैंग के 4 बदमाशों अरशद, मंजीत, सतीश और अन्य के साथ हुई मुठभेड़ में चारों बदमाश ढेर हुए थे, लेकिन इस दौरान इंस्पेक्टर सुनील कुमार के पेट में तीन गोलियां लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ 36 घंटे तक जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद 22 जनवरी को वह वीरगति को प्राप्त हो गए थे।  

उनके अदम्य साहस को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 लाख की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और मेरठ में एक सड़क का नाम उनके नाम पर करने की घोषणा की थी। वहीं डीजीपी प्रशांत कुमार और एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने पुलिस मुख्यालय में शहीद के परिजनों को बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से 1.80 करोड़ रुपये का चेक प्रदान किया था।  

मेरठ पुलिस लाइन में अंतिम विदाई के समय एडीजी जोन डीके ठाकुर, डीआईजी कलानिधि नैथानी, एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने उन्हें कंधा देकर अंतिम सलामी दी थी। आज की इस मुलाकात से पूरे मसूरी गांव में भावुकता और गर्व का माहौल है। ग्रामीणों ने कहा कि शासन-प्रशासन द्वारा शहीद परिवार को इस तरह सम्मान देना, शहादत का सच्चा सम्मान है।

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