आजादी
स्वतंत्रता की कीमत हमने,
देकर लहू चुकाई थी।
बलिदान हुए शीश जाने कितने,
तब जा कर आज़ादी आई थी।।
जाने कितने फांसी पर झूले,
जाने कितनो ने गोलियां खाई थी
खो-कर लाल मां ओ ने अपने,
हमे गुलामी से मुक्ति दिलाई थी।।
आज़ादी के दीवानों ने,
कसमें स्वाधीनता की खाई थी।
भारत मां को देकर जवानी अपनी,
मशाल क्रांति की जलाई थी।।
देकर कुर्बानिया जाने कितनी,
राह स्वतंत्रता की दिखाई थी।
संभाले रखना इस आज़ादी को,
बड़ी मुश्किलों से स्वतंत्रता आई थी।।
स्वतंत्रता दिवस की अनंत शुभकामनाएं
—रविंद्र तंवर 'सूर्योदय'
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