• दो इंच भी पानी नहीं पड़ा, अब नए वेदर सिस्टम से बरसेंगे बादल
• अब सीजन के बचे 45 दिनों में अच्छी बारिश की उम्मीद
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इन्दौर। अगस्त का आधा महीना बीत चुका है, लेकिन इंदौर के लोगों को अब भी झमाझम बारिश का इंतजार है। इस महीने में अब तक शहर में बमुश्किल दो इंच पानी ही गिरा है। रविवार को आसमान में बादल जरूर डेरा डाले हुए हैं, लेकिन तेज बारिश का दौर शुरू नहीं हो पाया है।
मानसून सीजन खत्म होने में अभी करीब 45 दिन (डेढ़ महीना) का समय बाकी है। ऐसे में शहरवासियों और किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होगी, क्योंकि शहर का बारिश का कोटा पूरा करने के लिए अभी 20 इंच से अधिक पानी की दरकार है।
इस मानसून सीजन में इंदौर में अब तक कुल 18 इंच के आसपास बारिश दर्ज की गई है। पिछले कुछ दिनों से सिर्फ रुक-रुक कर बूंदाबांदी ही हो रही है। इस साल अगस्त में अब तक किसी भी एक दिन में आधा इंच से ज्यादा पानी नहीं बरसा है। हालांकि, इतिहास देखें तो अगस्त महीने में इंदौर में औसतन 10 से 11 इंच बारिश (करीब 12-13 दिनों में) होती है।
महीने का रिकॉर्ड: साल 1944 के अगस्त महीने में इंदौर में रिकॉर्ड 28 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
24 घंटे का रिकॉर्ड: 22 अगस्त 2020 को महज 24 घंटे के भीतर शहर में करीब साढ़े 10 इंच पानी बरस गया था। इसके अलावा, बीते एक दशक में दो बार ऐसा मौका आया है जब अगस्त के महीने में 17 इंच से ज्यादा बारिश हुई है।
बचे हुए दिनों में औसत पार करने के आसार
मानसून की विदाई में अभी तकरीबन डेढ़ महीने का वक्त बचा हुआ है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मौसम प्रणालियां (वेदर सिस्टम) लगातार सक्रिय रहीं, तो इंदौर में अच्छी खासी बारिश हो सकती है। ऐसी स्थिति में न केवल सीजन का सामान्य कोटा पूरा होगा, बल्कि बारिश का कुल आंकड़ा औसत से भी ऊपर जा सकता है।
बंगाल की खाड़ी का सिस्टम जगा रहा उम्मीद
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना नया वेदर सिस्टम बारिश की गतिविधियों को फिर से तेज कर सकता है। यह सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए पश्चिम बंगाल और झारखंड की तरफ जा रहा है।
इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ लाइन के सक्रिय रहने की पूरी संभावना है। इसके चलते मध्य प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहेगा। प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में जहां भारी से अति भारी बारिश का अनुमान है, वहीं इंदौर सहित पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी इसका अच्छा खासा असर देखने को मिल सकता है।

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