नित्य संदेश
देश की सुरक्षा, राष्ट्र की रक्षा
देश की सुरक्षा के खातिर,
हथियार उठाना पर्याप्त नहीं।
देश की संपत्ति का नुकसान करना,
है ये भी कम अपराध नही।।
संस्कृति और सभ्यता बचाओ,
करना आधुनिकता पर अभिमान नहीं।
देश में रह कर अशांति जो फैलाए,
देश का वो इंसान नही।।
लूट रहे देश को नेता सारे,
बच पाता किसान नहीं।
राष्ट्र की रक्षा कर सके जो,
दिखता ऐसा इंसान नहीं।।
सोशल मीडिया पर नाचते युवा,
देश प्रेम इनके मन में नाम नहीं।
नव पीढ़ी का भविष्य अंधकार में,
बचा इनके पास अब काम नही।।
मैदान सुने पड़े है ख़ाली,
अब दौड़ने आते जवान नही।
फोन समाया सब के हाथो,
आंखो में किसी के सम्मान नही।।
सब को अपने स्वार्थ ने घेरा,
दिखता अब समाधान नहीं।
देना पड़ते है बलिदान कई,
राष्ट्र की रक्षा इतनी आसन नही।।
— रविन्द्र तंवर 'सूर्योदय'

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