कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने किया ध्वजारोहण, विद्यार्थियों की देशभक्ति प्रस्तुतियों ने बांधा समां
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में शनिवार, 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर सभी शिक्षकगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण एवं विद्यार्थियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान से पूरा विश्वविद्यालय परिसर देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो गया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने अपने संबोधन की शुरुआत “भारत माता की जय” और “वन्दे मातरम्” के जयघोष के साथ की। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि भारत के विश्वास, गौरव, एकता और राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान है। स्वतंत्रता दिवस असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान को स्मरण करने का पावन अवसर है, जिनके अदम्य साहस के कारण आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजादी का यह महापर्व 140 करोड़ देशवासियों के 140 करोड़ संकल्पों, सामूहिक उपलब्धियों और राष्ट्रीय गौरव का पर्व है। भारत की राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को सशक्त बनाने में संविधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हमारा संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता का मार्ग दिखाते हुए लोकतंत्र के लिए प्रकाश-स्तंभ की तरह कार्य कर रहा है। संविधान निर्माण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सहित अनेक राष्ट्रनिर्माताओं के योगदान को उन्होंने स्मरण किया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन एवं राष्ट्र निर्माण में नारी शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया।
कुलपति ने कहा कि स्वतंत्रता हमें केवल अधिकार प्रदान नहीं करती, बल्कि राष्ट्र के प्रति कर्तव्य और उत्तरदायित्व का भी बोध कराती है। हमें अपने ज्ञान, प्रतिभा, कौशल और कर्म को राष्ट्रहित से जोड़ते हुए विकसित भारत@2047 के निर्माण में योगदान देना होगा। उन्होंने कहा कि भारत आज ज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और मानवता के कल्याण के क्षेत्र में विश्व के समक्ष नई संभावनाएं प्रस्तुत कर रहा है। जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सतत विकास जैसी चुनौतियां पूरी मानवता की साझा चुनौतियां हैं और इनके समाधान में भारत की भूमिका एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में लगातार महत्वपूर्ण हो रही है।
्उरन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि युवा केवल वैश्विक अवसरों के लिए तैयार न हों, बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान का हिस्सा बनें। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थी अपनी स्थानीय जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक दृष्टि विकसित करें तथा ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को मानवता के व्यापक कल्याण से जोड़ें। कुलपति ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि विचारों को संकल्प में, संकल्प को परिश्रम में और परिश्रम को उपलब्धि में बदलना ही सफलता का वास्तविक मार्ग है। विद्यार्थियों को अपने जीवन के लक्ष्य निर्धारित कर ईमानदारी, अनुशासन, निरंतरता और कठोर परिश्रम के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विवेक का विस्तार और जिज्ञासा का जागरण करना भी है। कौशल-आधारित शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देकर युवाओं को रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ रोजगार सृजित करने तथा राष्ट्र की समस्याओं के समाधान में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है।
अपने संबोधन में कुलपति ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी के ग्रामीण विकास, किसान कल्याण, सामाजिक न्याय और आत्मनिर्भरता के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में निरंतर योगदान दे रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय को NAAC द्वारा A++ ग्रेड प्राप्त होने को गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्कृष्ट अनुसंधान और नवाचार की संस्थागत संस्कृति का प्रमाण ह…



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