नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ।, 14 अगस्त 2026। राधा गोविंद मंडप में चल रहे सप्त दिवसीय सत्संग के तृतीय दिवस पर पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए नाम महिमा और संत स्वभाव पर प्रकाश डाला।
स्वामी जी ने कहा कि गोस्वामी जी ने नाम की महिमा का बहुत विस्तार से वर्णन किया है और कहा है कि नाम के प्रभाव से सब कुछ संभव है। सत्संग में क्रम से आगे बढ़ने का प्रयास करो। भगवान के कार्य में जो कुछ करो और जब करो, वही समय श्रेष्ठ है। हमारे हृदय में भगवान विराजमान हो जाएं, यही रामराज्य है और इससे दैहिक, दैविक एवं भौतिक ताप की निवृत्ति हो जाती है। श्रेष्ठ जनों के साथ से माया से पार जाने का उपाय मिल जाता है। संत का महत्व बताते हुए महाराज जी ने कहा कि संत की पहचान वेशभूषा या व्यवहार से नहीं होती। भरत जी ने प्रभु से संत के विषय में पूछा तो प्रभु ने बताया - जिस प्रकार चंदन के पेड़ को बीच से काटने पर वह अपना गुण कुल्हाड़ी को दे देता है और कुल्हाड़ी में भी चंदन की सुगंध आ जाती है, उसी प्रकार संत का स्वभाव होता है। संत को सुनने से उनके शिष्यों में भी सुगंध आ जाती है। कोई संत का अहित भी करता है तो संत उसका भी कल्याण करते हैं। उन्होंने कहा कि संशय यानी शंका संसार में फंसाती है और जिज्ञासा आपको आगे बढ़ाती है। आपकी कीमत ज्ञान से है, इसलिए हमेशा जिज्ञासु बने रहना चाहिए। अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ। इस अवसर पर मनोज गुप्ता, बबीता गुप्ता, आर.के. प्रसाद, गोविंद अग्रवाल, मयंक अग्रवाल सहित अनेक भक्तजन उपस्थित रहे।

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