नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उमर इस्लामिक सेंटर कमालपुर के तत्वावधान में एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश, समाज और धर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रमुख हस्तियों को "तमग़ा-ए-इम्तियाज़" से सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वालों में मौलाना नबील अहमद कमालपुरी, अध्यक्ष जमीयत उलेमा जिला मेरठ; कारी महबूब हसन मुज़फ्फरनगरी, कन्वीनर (जेम) जमीयत उलेमा तहसील मेरठ; मुफ़्ती ख़ालिद सैफ़ुल्लाह, महासचिव जमीयत उलेमा तहसील मेरठ; सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक भाटी तथा कमालपुर के पूर्व प्रधान हाफ़िज़ आसिफ़ शामिल हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना नबील अहमद कमालपुरी ने की, जबकि मंच संचालन मुफ़्ती ख़ालिद सैफ़ुल्लाह ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रपति पदक विजेता हाजी मास्टर अब्दुस्समद, पूर्व प्रधान कृष्ण स्वरूप और पूर्व प्रधान संत राम ने सभी सम्मानित जनों को स्मृति-चिन्ह भेंट किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ पवित्र कुरआन की तिलावत और नात-ए-पाक से हुआ। इस दौरान सेंटर से कुरआन शरीफ़ की शिक्षा मुकम्मल करने वाले लगभग 30 छात्र-छात्राओं को भी विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए मौलाना नबील अहमद कमालपुरी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में हिन्दू-मुसलमानों ने कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों का मुकाबला किया। उलेमा ने जिहाद के फतवे दिए, कई स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी और काला पानी की सजा दी गई, लेकिन उसी मशाल ने 1947 में आजादी दिलाई।
मुफ़्ती ख़ालिद सैफ़ुल्लाह ने कहा कि आज का दिन गुमनाम शहीदों को श्रद्धांजलि देने का दिन है, हमें उनके बलिदानों को याद रखकर आजादी की हिफाजत का संकल्प लेना चाहिए।
सेंटर के प्रबंधक हाफ़िज़ सैफ़ुल इस्लाम उर्फ़ शहपर कमालपुरी ने स्वागत भाषण में कहा कि अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और धार्मिक हस्तक्षेप के खिलाफ मेरठ और दिल्ली से उठी चिंगारी ही पूरे देश में आजादी की लहर बनी।
कार्यक्रम के अंत में देश की सुरक्षा, शांति और समृद्धि के लिए विशेष दुआ की गई। इस मौके पर हुसैन अहमद, हाफ़िज़ मोहम्मद अहमद, मास्टर मुहम्मद साकिब, मोहम्मद यूसुफ़, हाफ़िज़ मुआविया, साहिबज़ादा हाफ़िज़ मुजीबुर्रहमान रशीदी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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