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Monday, August 10, 2026

15 अगस्त को शुरू होगी 171 घंटे की नॉनस्टॉप यात्रा : भक्ति में इंदौर रचेगा नया कीर्तिमान, 2100 किमी दौड़ेगी ‘सीताराम डाक कावड़’

• 30 से ज्यादा चार पहिया वाहनों के काफिले में 400 से अधिक श्रद्धालु रामेश्वरम रवाना 


नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। भक्ति आस्था और संकल्प की अनूठी मिसाल पेश करने के लिए इंदौर एक बार फिर तैयार है। सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की भक्ति को समर्पित ‘सीताराम डाक कावड़’ इस बार रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग से इंदौर तक करीब 2100 किलोमीटर की दूरी दौड़ते हुए तय करेगी। आयोजकों के अनुसार यह विश्व की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली डाक कावड़ यात्रा है, जिसमें कावड़िए दिन-रात लगातार दौड़ते हुए जल लेकर इंदौर पहुंचेंगे।


अरण्य धाम संत आश्रम के अधिष्ठाता  महामंडलेश्वर  रामजी बाबा ने बताया कि सोमवार शाम 10 अगस्त को स्कीम नंबर 78 स्थित अरण्य धाम संत आश्रम से संत-महंत और आचार्यों के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं का काफिला रामेश्वरम के लिए रवाना हुआ। रवाना होने से पहले आश्रम में  सुबह  9बजे से शाम तक हवन, पूजन और वैदिक अनुष्ठान हुआ, बड़ी संख्या में एकत्रित संत महात्माओं को देखने के लिए स्थानीय रवासियों का भी ताता लगा रहा । इसके बाद 30 से अधिक चार पहिया वाहनों के काफिले में 400 से ज्यादा श्रद्धालु भक्त रामेश्वरम के लिए रवाना हुए।


15 अगस्त को रामेश्वरम से शुरू होगी दौड़

रामेश्वरम पहुंचने के बाद 15 अगस्त को सुबह करीब 9 बजे विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान के बाद सीताराम डाक कावड़ की नॉनस्टॉप दौड़ शुरू होगी। लक्ष्य है कि करीब 2100 किलोमीटर की दूरी को 171 घंटे में लगातार दौड़ते हुए पूरा कर कावड़ इंदौर पहुंचे।कावड़ यात्रा की खासियत यह है कि कोई एक व्यक्ति लगातार पूरी दूरी नहीं दौड़ेगा। 

कावड़िए बारी-बारी से जिम्मेदारी संभालेंगे और करीब 150 से 200 मीटर की दूरी दौड़कर कावड़ को अगले धावक को सौंपेंगे। इस तरह दिन-रात बिना रुके कावड़ आगे बढ़ती रहेगी।इंदौर पहुंचने के बाद अरण्य धाम संत आश्रम स्थित श्री राम-रामेश्वर महादेव मंदिर में रामेश्वरम से लाए गए पवित्र जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा।


राजस्थान से भी पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु

इस धार्मिक यात्रा में सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। राजस्थान के टोंक से 150 से अधिक सीताराम भक्त मंडल के श्रद्धालु भी वाहनों के काफिले के साथ रामेश्वरम के लिए रवाना हुए हैं।

इसके अलावा इंदौर, भोपाल, उज्जैन, झाबुआ, खरगोन और खंडवा सहित अन्य क्षेत्रों के श्रद्धालु भी इस अनूठी डाक कावड़ यात्रा में सहभागी बन रहे हैं। यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और सभी के मन में एक ही संकल्प है—भगवान शिव तक रामेश्वरम का पवित्र जल पहुंचाना और इंदौर में भगवान राम-रामेश्वर महादेव का अभिषेक करना।


भक्ति के साथ सेवा का भी संकल्प

यात्रा में श्रद्धालुओं की सुविधा और खान-पान की व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। करीब 25 सदस्यों का रसोइयों का दल भी काफिले के साथ रामेश्वरम रवाना हुआ है। लंबी दूरी की यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी यह दल संभालेगा।

अरण्य धाम संत आश्रम के संस्थापक महामंडलेश्वर रामजी बाबा एवं सीताराम भक्त मंडल के कमलेश्वर सिंह सिसोदिया ने बताया कि यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन, सेवा और सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।


2015 से जारी है सीताराम डाक कावड़

‘सीताराम डाक कावड़’ की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। तब से लगातार विभिन्न पवित्र तीर्थस्थलों से जल लाकर इंदौर के राम-रामेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का अभिषेक किया जाता रहा है। पिछले वर्षों में ओंकारेश्वर, अमरकंटक, गंगोत्री, द्वारका और अयोध्या सहित कई धार्मिक स्थलों से कावड़ के माध्यम से पवित्र जल इंदौर लाया जा चुका है।


इस बार पहली बार रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग से इंदौर तक करीब 2100 किलोमीटर की दूरी तय करने का संकल्प लिया गया है। 15 अगस्त को रामेश्वरम से शुरू होने वाली यह नॉनस्टॉप दौड़ 171 घंटे के निर्धारित लक्ष्य के साथ इंदौर की ओर बढ़ेगी।


भक्ति का संदेश—संकल्प हो तो दूरी मायने नहीं रखती

सीताराम डाक कावड़ यात्रा सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान तक जल लाने की यात्रा नहीं है। यह उन श्रद्धालुओं के विश्वास और संकल्प की यात्रा है, जिनके लिए भगवान की भक्ति में दूरी, थकान और समय की सीमाएं भी छोटी पड़ जाती हैं।


रामेश्वरम से इंदौर तक 2100 किलोमीटर की दूरी को लगातार दौड़ते हुए तय करने का यह संकल्प भक्ति, सामूहिकता और सेवा का संदेश भी दे रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं का एक साथ आना यह बताता है कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती। यह देश की अनोखी और ऐतिहासिक कावड़ यात्रा है यह 2100 किलोमीटर दौड़ते हुए आएंगे। 

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