
• श्री लक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग से, जन-जन को दर्शन देने निकले गोविंदा
• गोविंदा-गोविंदा के जयघोष के साथ हजारों हाथों ने खींचा प्रभु वेंकटेश का रजत रथ
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। पावनसिद्ध धाम श्रीलक्ष्मी-वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग से आज देश की तीसरी सबसे बड़ी पारंपरिक गौरवशाली रथयात्रा 'गोविंदा-गोविंदा' के महा जय-जयकार के साथ निकली। हर भक्त की निगाह ठाकुरजी की एक झलक पाने को अपलक निहार रही थी। हर भक्त के मन, दिल और नेत्रों में प्रभु वेंकटेश नजर आ रहे थे।



रथयात्रा छत्रीबाग से प्रारंभ होकर नरसिंह बाज़ार, सीतलामाता बाज़ार, गोरकुण्ड चौराहा, शक्कर बाज़ार, बड़ा सराफा, पीपली बाज़ार, बर्तन बाज़ार, बजाजखाना, साठा बाज़ार से होते हुए पुनः मंदिर में आई। इस रथयात्रा के मार्ग में करीब 250 स्थानों पर मंचों से इस यात्रा का भव्य पुष्पों से स्वागत किया गया। जगह-जगह परिवारों व व्यापारियों द्वारा प्रसाद की व्यवस्था भी की गई थी। सभी व्यापारियों ने बाज़ारों में रथयात्रा का स्वागत किया और प्रभु का सत्कार किया। पूरे मार्गों पर स्वागत द्वार, ध्वज-पताकाएँ और विद्युत सज्जा भी की गई थी।
सुंदर संदेशों के साथ निकली यात्रा में झाँकियाँ
धार्मिक यात्रा में देश की प्रगति और उन्नति के लिए भी संदेश प्रमुखता से दिया गया। साथ ही संस्कृति के संदेश के साथ रथयात्रा में गौमाता की रक्षा करने और हर दिन के चूल्हे की पहली रोटी गाय तक पहुँचाने की अपील को मार्मिकता के साथ उठाया गया। साथ ही शेषावतार श्री रामानुज स्वामीजी को कमल के पुष्प पर विराजमान किया गया था, जहाँ प्रभु जगन्नाथ का रूप अद्भुत नज़र आया।
देशभक्ति और धर्म की ओर इस बार युवाओं का रथयात्रा में जज़्बा अलग ही नज़र आ रहा था। उसी को लेकर भगवान जगन्नाथ जी की झाँकी भी दर्शन देते निकली। साथ ही देश भर से पधारे 21 संत बग्घियों में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे थे।

रथ के आगे सजी-धजी महिलाओं के वर्ग के साथ ही युवा एवं युवतियाँ झाड़ू लगा रहे थे। उसके पीछे पुष्पों से सजे-धजे रजत रथ में प्रभु वेंकटेश, श्री श्रीदेवी और श्री भूदेवी के साथ रजत शेष पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे थे। हज़ारों लोग प्रभु के इस दिव्य, पुष्पों से सजे रजत रथ को (जिस पर प्रभु की सुंदर कलाकृतियाँ उभरी हुई थीं) अपने हाथों से खींच रहे थे। साथ ही अनेक भक्त रथ पर सिर टिकाकर प्रभु से मंगल कामना कर रहे थे और आशीर्वाद ले रहे थे। रास्ते भर अनेक जगह भक्तों द्वारा थाली सजाकर प्रभु की आरती व गुरुदेव का चरण-पूजन किया जा रहा था। पूरे यात्रा मार्ग को भगवा ध्वज-पताकाओं और पुष्पों के द्वारा सजाया गया था।

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