“एमसीयू में एआई एफडीपी का नौवां दिन”
नित्य संदेश ब्यूरो
भोपाल। इंसानी परिकल्पनाओं की कोई सीमा नहीं है। एआई की यात्रा भी इसी तरह की है। इसकी बुनियाद में स्वचालित क्रियाएं हैं। लोग प्राचीन समय में स्वचालित मशीनों की परिकल्पनाएं करते थे। वे विचार और कल्पनाएं दरअसल एआई से मिलता जुलती अवधारणाएं ही थीं। भारत सहित दुनिया की कई अन्य प्राचीन सभ्यताओं में एआई से मिलती जुलती परिकल्पनाएं मिलती हैं। आधुनिक समय में कंप्यूटर की खोज से पहले से ही इस दिशा में काम चल रहा है। और सूचना क्रांति के इस युग में एआई हमारे वर्तमान का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। आज एआई का दखल आज हर सेक्टर में बढ़ रहा है। यह बात एआईएलजीओ के सीईओ श्री बालेंदु शर्मा दाधीच ने एमसीयू में चल रहे एआई एफडीपी में कही ।
श्री दाधीच आज इस एफडीपी के तकनीकी सत्र में बतौर विशेषज्ञ संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एआई बहुत बड़े डेटा का विश्लेषण पैटर्न के आधार पर करता है। यह एक ऐसी तकनीक है जो सूचनाओं और डेटा का विश्लेषण कर हमें कई समस्याओं का समाधान देने में सक्षम है। इसके साथ काम करने पर आश्चर्यजनक तेजी से परिणाम मिलते हैं। एआई के जरिये ही मशीनें डेटा को ज्ञान में तब्दील कर हमें देती हैं।
इस अवसर पर एक अन्य सत्र में वरिष्ठ पत्रकार और एआई ट्रेनर देविका छिब्बर ने कहा कि टेक्नालाजी ने टीवी और प्रिंट मीडिया में न्यूजरूम इकोसिस्टम को बहुत व्यापक पैमाने पर बदल दिया है। यहां एआई और एजेंटिक एआई का हस्तक्षेप दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। उन्होंने बताया कि हर दिन एक नया टूल आ रहा है इसलिए तकनीकें पूरे इकोसिस्टम को बहुत तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में बहुत से विशेषज्ञों के लिए इंडस्ट्री में अच्छे अवसर बनेंगे।
उन्होंने कहा कि एआई के दौर में इसकी साक्षरता बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए एआई प्रशिक्षकों की बहुत आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने फैक्टचेकिंग प्लेटफार्म,एआई पालिसी और गर्वनेंस सहित कई एआई टूल्स पर विस्तार से चर्चा की।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार श्री सुशील प्रताप सिंह ने कहा कि पत्रकारिता में एआई एक असिस्टेंट है जादुई जिन्न नहीं है। उन्होंने पत्रकारिता में ए आई के फायदे, सीमाएं और गंभीर खतरों पर ध्यान आकर्षित किया। श्री सिंह ने कहा कि एआई को हम अपने सांचे में अपनी जरुरत के मुताबिक ढाल लें तो उससे बेहतर काम लिया जा सकता है। उन्होंने मीडिया न्यूजरूम में एआई के साथ तकरीबन 16 अलग-अलग तरह के काम आसानी से किये जा सकते हैं। इससे जहां अनुवाद और डाटा प्रोसेसिंग जैसे कामों में फायदा तो हुआ है लेकिन चुनौतियाँ भी साथ आई हैं। क्योंकि अगर एआई को हमने ट्रेंड नहीं किया, सिस्टम निर्देश नहीं दिए तो वह मनगढंत जानकारी दे सकता है जो बिना किसी वेरिफिकेशन के अखबार में चली जाए तो उससे संस्था और समूची पत्रकारिता की साख प्रभावित हो सकती है।
श्री सिंह ने कहा कि पत्रकारिता में एआई ने बहुत सा समय बचा लिया है अब उस बचे समय का उपयोग एआई को समझने में करना जरुरी है ताकि वह कम से कम गलती करें और हमारा सहयोगी बन सके। उन्होंने प्रोम्प्ट इंजीनियरिंग सहित एआई के गंभीर खतरों को कुछ उदाहरण के माध्यम से समझाया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी विभागों के शिक्षक उपस्थित थे।
कल इस एफडीपी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि आईआईआईटी के निदेशक प्रोफेसर आशुतोष कुमार सिंह होंगे। इसके साथ ही तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञ जेनेरेटिव एआई, कंटेंट क्रिएशन, एआई न्यूजरूम टूल्स सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर एक्सपर्टस हैंड्स-आन प्रशिक्षण देंगे।
डा पवित्र श्रीवास्तव
विभागाध्यक्ष
विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग, एमसीयू, भोपाल





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