• मेरठ में माटीकला स्थापना पखवाड़ा के तहत जागरूकता एवं
प्रशिक्षण कार्यक्रम
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। पारंपरिक माटीकला को आधुनिक बाजार से जोड़कर कुम्हारों की आय बढ़ाने की
दिशा में उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड ने पहल तेज कर दी है। माटीकला स्थापना
पखवाड़ा के तहत शुक्रवार को जिला पंचायत सभागार कचहरी परिसर में एक दिवसीय माटीकला
जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जिले के करीब 200 माटीकला
कारीगरों और लाभार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक, वैल्यू एडिशन, सरकारी योजनाओं और विपणन के नए अवसरों
की जानकारी दी गई।
10 लाख तक ऋण और 25 प्रतिशत अनुदान की
सुविधा
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने कहा कि माटीकला केवल पारंपरिक
व्यवसाय नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि
मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को बैंक के माध्यम से 10 लाख रुपये तक का ऋण 25 प्रतिशत अनुदान के साथ
उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा विद्युत चालित चाक, पगमिल
मशीन और अन्य आधुनिक टूलकिट भी पात्र कारीगरों को निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कारीगरों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और उन्हें आधुनिक तकनीक से
जोड़ने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
दीपावली मेले में मिलेगा उत्पाद बेचने का सुनहरा अवसर
मान्या चतुर्वेदी ने बताया कि इस वर्ष दीपावली से पहले विशेष माटीकला मेले का
आयोजन किया जाएगा। इसमें कुम्हारों को निशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे अपने
उत्पादों का प्रदर्शन कर सकें और त्योहारी सीजन में बेहतर बिक्री का लाभ उठा सकें।
वैल्यू एडिशन से बढ़ेगी उत्पादों की मांग
प्रसिद्ध कलाकार शिप्रा शर्मा ने कारीगरों को मिट्टी के उत्पादों में वैल्यू
एडिशन के आधुनिक तरीके सिखाए। उन्होंने पेंटिंग, सजावटी
कलाकृतियों और अन्य रचनात्मक तकनीकों के माध्यम से उत्पादों को आकर्षक एवं बाजार
की मांग के अनुरूप बनाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बदलती उपभोक्ता पसंद के
अनुसार नवाचार अपनाकर कारीगर अपने उत्पादों का मूल्य और बिक्री दोनों बढ़ा सकते
हैं।
विद्युत चालित चाक का व्यावहारिक प्रदर्शन
माटीकला प्रशिक्षक श्यामसुन्दर ने विद्युत चालित चाक के माध्यम से विभिन्न
मिट्टी के उत्पाद तैयार करने का लाइव प्रदर्शन किया। उन्होंने आधुनिक उपकरणों के
उपयोग, कम समय में बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने और उत्पादन प्रक्रिया
को सरल बनाने की तकनीकों से कारीगरों को अवगत कराया। प्रशिक्षण के दौरान
प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक नई तकनीकों को सीखा।
पर्यावरण संरक्षण में कुम्हारों की अहम भूमिका
मुख्य अतिथि गौरव चौधरी ने कहा कि कुम्हार समुदाय सतत विकास और पर्यावरण
संरक्षण का महत्वपूर्ण भागीदार है। प्लास्टिक के विकल्प के रूप में मिट्टी के
बर्तनों और सजावटी वस्तुओं की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कारीगरों से
गुणवत्ता सुधारने, उत्पादन बढ़ाने और नए डिजाइनों को अपनाकर बाजार की बढ़ती मांग
का लाभ उठाने का आह्वान किया।
आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल
कार्यक्रम के अंत में कारीगरों ने प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं
की जानकारी और विपणन संबंधी मार्गदर्शन को उपयोगी बताते हुए ऐसे कार्यक्रमों के
नियमित आयोजन की मांग की। अधिकारियों ने कहा कि उद्देश्य कारीगरों को आत्मनिर्भर
बनाना, उनकी आय बढ़ाना और पारंपरिक माटीकला उद्योग को आधुनिक
बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप सशक्त करना है।

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