नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। जैन श्वेतांबर देवसुर तपागच्छ समाज के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बन गया। इंदौर की पावन धरा पर पहली बार देवसुर तपागच्छ के 81 संतों का एक साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अद्वितीय अवसर का साक्षी बनने के लिए शहरभर से हजारों श्रावक-श्राविकाएं उमड़ पड़ीं। संतों के आगमन से पूरा शहर भक्ति, श्रद्धा और धर्ममय वातावरण में सराबोर दिखाई दिया।
भव्य स्वागत से गूंजा इंदौर...
हायलिंक सिटी स्थित जैन तपागच्छ मंदिर में जैसे ही संतों का पदार्पण हुआ, श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया। बैंड-बाजों की मधुर धुन, महिलाओं द्वारा सिर पर मंगल कलश धारण कर निकाली गई शोभायात्रा तथा श्री नवकार परिवार के युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। नगर प्रवेश मार्ग पर जगह-जगह गुरुदेव की अगवानी, पुष्पवर्षा और गवली (स्वागत) की गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिरस से ओतप्रोत हो उठा।
लंबी पदयात्रा के बाद इंदौर पहुंचे संत...
वडील आचार्य राजचंद्रसुरेश्वरजी महाराज सा., पूज्य गच्छाधीपति श्री विज्ञानप्रभसुरेश्वरजी महाराज सा., पंन्यासजी, गणिवर्यजी तथा साधु-साध्वी भगवंत सहित 81 संत गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से लंबी पदयात्रा कर इंदौर पहुंचे हैं। आगामी चार महीनों तक ये संत इंदौर के लगभग 20 प्रमुख श्रीसंघों में चातुर्मास कर धर्म आराधना एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन देंगे।
26 जुलाई को होगा मुख्य चातुर्मास प्रवेश...
पूज्य गच्छाधीपति श्री विज्ञानप्रभसुरेश्वरजी महाराज सा. का भव्य चातुर्मास प्रवेश 26 जुलाई को रेसकोर्स रोड स्थित श्रीसंघ में होगा। इसके अतिरिक्त पिपली बाजार, तिलक नगर, कालानी नगर, कंचन बाग, रतनबाग, विजय नगर, महेश नगर, गुमास्ता नगर, द्वारकापुरी सहित विभिन्न श्रीसंघों में संतों का मंगल प्रवेश निर्धारित तिथियों पर संपन्न होगा।
धर्म पुरुषार्थ का दिया संदेश...
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में पूज्य गुरुदेव ने कहा कि इंदौर आगमन का उद्देश्य समाज को प्रमाद त्यागकर धर्म पुरुषार्थ की ओर अग्रसर करना है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान धर्म आराधना, सदाचार, ध्यान, संयम एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी जाएगी, जिससे मानव जीवन धर्मनिष्ठ एवं संस्कारवान बन सके।
108 कल्याण मित्रों ने संभाली व्यवस्थाएं...
इस ऐतिहासिक आयोजन के सफल संचालन में श्री नवकार परिवार के 108 कल्याण मित्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नगर प्रवेश के दौरान सभी कल्याण मित्र उत्साहपूर्वक नृत्य करते हुए चल रहे थे तथा नवकारसी अल्पाहार सहित समस्त व्यवस्थाओं का संचालन कर रहे थे। सामैया का सुंदर संचालन मूर्तिपूजक युवा महासंघ के सदस्यों ने किया। देवसुर तपागच्छ के विभिन्न संघों से आई महिला मंडलों ने कलश, ध्वज एवं तख्तियां लेकर चल समारोह की शोभा बढ़ाई।
इनका रहा विशेष योगदान...
इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में पुण्यपालजी सुराणा, कैलाशजी नाहर, यशवंतजी जैन, पुंडरीकजी पालरेचा, प्रवीण गुरुजी, महेंद्र गुरुजी, विपिन सोनी, आर.के. मेहता, आर.सी. जैन, अरविंद डोसी, प्रकाश शाह, शरद शाह, सोमिल कोठारी, विशाल बम, जयंत खाबिया, वीरेंद्र बम सहित इंदौर के अनेक वरिष्ठजनों तथा समग्र देवसुर तपागच्छ संघ के पदाधिकारियों का उल्लेखनीय योगदान रहा।
इंदौर में पहली बार 81 संतों का एक साथ नगर प्रवेश जैन समाज के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति से परिपूर्ण इस विराट आयोजन ने पूरे शहर को धर्ममय बना दिया तथा चातुर्मास के चार महीनों के लिए आध्यात्मिक वातावरण की भव्य शुरुआत कर दी।



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