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Thursday, July 9, 2026

भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के समन्वय से होगा सशक्त भारत का निर्माण : प्रो संगीता शुक्ला

भारतीय शिक्षा व्यवस्था भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं राष्ट्र निर्माण की आधारशिला


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय शिक्षा सप्ताह के अंतर्गत गुरुवार को "भारतीय शिक्षा व्यवस्था" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला द्वारा दीप प्रज्वलित कर तथा माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके किया गया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि भारतीय शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने या रोजगार अर्जित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के सर्वांगीण विकास, चरित्र निर्माण, सांस्कृतिक चेतना तथा राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार है। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण से भी समृद्ध हों। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय शिक्षा को नई दिशा प्रदान करने वाली ऐतिहासिक नीति है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा आधारित शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास तथा बहुविषयक शिक्षा को प्रोत्साहित करती है। विश्वविद्यालय इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयासरत है ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुख एवं मूल्यपरक शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।कुलपति प्रो. शुक्ला ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा ने पूरे विश्व को ज्ञान, दर्शन, विज्ञान, योग, आयुर्वेद एवं मानवीय मूल्यों का मार्ग दिखाया है। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा का गंभीर अध्ययन करे तथा आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के साथ उसका समन्वय स्थापित कर वैश्विक स्तर पर भारत की बौद्धिक नेतृत्व क्षमता को और अधिक सशक्त बनाए। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे शिक्षा को केवल करियर तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज सेवा, राष्ट्रहित एवं मानव कल्याण का माध्यम बनाएं।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रो. अनिल मलिक ने "भारतीय शिक्षा व्यवस्था" विषय पर व्याख्यान देते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की स्थापना, उसकी विकास यात्रा तथा वर्तमान में देशभर में संचालित विभिन्न शैक्षिक एवं सांस्कृतिक अभियानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों, राष्ट्रीय चेतना, मातृभाषा आधारित शिक्षा एवं भारतीय जीवन-दृष्टि को शिक्षा के माध्यम से समाज तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।प्रो. मलिक ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था को केवल सूचना और ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसका वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, नैतिकता, अनुशासन, सेवा भाव, राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक गौरव एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना है। उन्होंने कहा कि वैदिक एवं गुरुकुल परंपरा से लेकर आधुनिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तक भारतीय शिक्षा की मूल भावना सदैव मानवता के कल्याण, ज्ञान के प्रसार तथा चरित्रवान नागरिकों के निर्माण की रही है।


उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय दर्शन, योग, आयुर्वेद, पर्यावरण चेतना, जीवन मूल्यों एवं कौशल आधारित शिक्षण से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 इसी दिशा में एक दूरदर्शी पहल है, जिसमें विद्यार्थियों की रचनात्मकता, नवाचार, शोध क्षमता तथा मातृभाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है।प्रो. मलिक ने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे भारतीय दर्शन, संस्कृति, शिक्षा के सांस्कृतिक आयामों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों पर गंभीर अध्ययन एवं शोध करें। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा आज भी विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है और यदि आधुनिक शिक्षा को भारतीय जीवन मूल्यों के साथ जोड़ा जाए तो भारत पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में सशक्त कदम बढ़ा सकता है।


व्याख्यान के उपरांत शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भारतीय शिक्षा प्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न प्रस्तुत किए, जिनका प्रो. अनिल मलिक ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने व्याख्यान को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं समसामयिक बताया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण, संस्कार एवं नैतिक शिक्षा के संवर्धन, मातृभाषा आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा समावेशी एवं राष्ट्रोन्मुख शिक्षा के प्रति व्यापक जागरूकता विकसित करना था।अंत में शिक्षा विभाग की ओर से प्रो. अरुण कुमार ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. राकेश शर्मा, प्रो. विजय जायसवाल, डॉ. जितेन्द्र गोयल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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