कार्यक्रम का शुभारम्भ भारतीय संस्कृति की पावन परंपरा के अनुरूप दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन में सुभारती विश्वविद्यालय के सम-कुलाधिपति मेज. जन. (डॉ.) जी.के. थपलियाल,एसएम, (सेनि.), कुलपति प्रो.(डॉ.) मुनीश सी. रेड्डी, ललित कला संकाय के डीन प्रो.(डॉ.) पिंटू मिश्रा, विभाग अध्यक्ष मंच कला विभाग प्रो.(डॉ.) भावना ग्रोवर, भारतीय विश्वविद्यालय संघ की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल, संयुक्त सचिव डॉ. आलोक कुमार मिश्रा, युवा कार्य एवं सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ के प्रमुख शिवम दीक्षित, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की कुलपति प्रो. लवली शर्मा, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर की कुलपति प्रो. स्मिता सहस्रबुद्धे तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष प्रो. अनूप लाठर आदि उपस्थित रहे।
बैठक में सुभारती विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक समिति की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भावना ग्रोवर ने सभी को विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक गतिविधियों से परिचित कराया और बताया कि सुभारती विश्वविद्यालय पिछले 12 वर्षों से भारतीय संस्कृति के संवर्धन के लिए उत्कृष्ट कार्य कर रहा है जिसके अंतर्गत युवा महोत्सव में विश्वविद्यालय की प्रतिभागिता राज्य स्तरीय उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के प्रतियोगिताओं में प्रतिभागिता व् देश के अन्य संगीत में नृत्य समारोह में प्रदर्शन आदि शामिल है,
सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ.) मुनीश सी. रेड्डी ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी का अभिनंदन करते हुए कहा कि सुभारती विश्वविद्यालय के लिए यह अत्यंत गौरव एवं सौभाग्य का विषय है कि भारतीय विश्वविद्यालय संघ ने अपनी 18वीं नेशनल कल्चरल बोर्ड मीटिंग की मेजबानी का दायित्व विश्वविद्यालय को सौंपा है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा, कला और संस्कृति एक साथ आगे बढ़ती हैं, तभी एक संवेदनशील, रचनात्मक और उत्तरदायी समाज का निर्माण होता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस राष्ट्रीय बैठक से निकलने वाले सुझाव देशभर के विश्वविद्यालयों में सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे तथा विद्यार्थियों में भारतीयता, रचनात्मकता और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।
भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) के अध्यक्ष एवं छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने वर्चुअल माध्यम से बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आज उच्च शिक्षा में केवल अकादमिक उत्कृष्टता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष बल देती है और विश्वविद्यालयों को इस दिशा में गंभीरता से कार्य करना चाहिए। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक संस्थान यह संकल्प ले कि उसका प्रत्येक विद्यार्थी कम से कम एक सांस्कृतिक गतिविधि से अवश्य जुड़े। संगीत, नृत्य, नाटक, लोक कलाओं एवं साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ती है और उनमें नेतृत्व, आत्मविश्वास, अनुशासन तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है। प्रो.पाठक ने आगे कहा कि विश्वविद्यालयों के बीच आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं एवं युवा महोत्सवों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि प्रतिभाओं को व्यापक मंच मिल सके। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और गुणवत्तापूर्ण आयोजन व्यवस्था पर विशेष बल देते हुए कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियां युवाओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यार्थियों का समग्र विकास तभी संभव है जब शिक्षा के साथ कला, संस्कृति, साहित्य एवं रचनात्मक गतिविधियों को समान महत्व दिया जाए। डॉ. मित्तल ने शिक्षकों से भी आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को प्रेरित करने के साथ स्वयं भी सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालय संघ का उद्देश्य देशभर के विश्वविद्यालयों को एक साझा सांस्कृतिक मंच पर जोड़ना है, जिससे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सके।
बैठक में विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय एवं मंच कला विभाग की स्थापना, विकास यात्रा एवं उपलब्धियों का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया गया। बताया गया कि वर्ष 2009 में स्थापित ललित कला संकाय ने चित्रकला एवं मूर्तिकला से अपनी यात्रा प्रारम्भ की थी, जबकि वर्ष 2013 में स्थापित मंच कला विभाग आज भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं मंचीय कलाओं में स्नातक से पीएचडी स्तर तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है। विभाग की ओर से यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2023-24 में एआईयू द्वारा आयोजित सेंट्रल ज़ोन यूथ फेस्टिवल की सफल मेजबानी कर सुभारती विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता, सांस्कृतिक नेतृत्व एवं आतिथ्य का परिचय दिया।
विश्वविद्यालय ने जानकारी दी कि विभाग में कई कलाकार एवं कला-साधक भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रशिक्षण, शोध, कार्यशालाओं, संगोष्ठियों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत पिछले पाँच वर्षों से प्रशिक्षण, शोध एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।
बैठक में देशभर से आए प्रतिनिधियों का भव्य स्वागत किया गया, जिनमें प्रो. (लेफ्टिनेंट) डी. एस. चौहान,(सेनि.)- सिंघानिया विश्वविद्यालय, उदयपुर, प्रो. संतोष पाठक–बनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान, डॉ. नीलम वर्मा –चितकारा विश्वविद्यालय पंजाब, प्रो. (डॉ.) ज्योति रंजन दास, शिक्षा औ अनुसंधान(डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय) भुवनेश्वर, डॉ. शांति नारायणन, शारदा विश्वविद्यालय, डॉ. रचना बंसल, शारदा विश्वविद्यालय, आदि शामिल रहे, साथ ही बैठक में कुछ विश्वविद्यालय के छात्र कलाकारों ने भी अपने विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें पारुल विश्वविद्यालय बडौदा, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय पंजाब, मणिपुर विश्वविद्यालय इंफाल, वनस्थली विद्यापीठ राजस्थान, के छात्रों ने अपनी सक्रिय सहभागिता अपने उत्कृष्ट विचारों के साथ की ।
बैठक में अनेक बिंदुओं पर बात हुई जिसमें इस वर्ष होने वाले जोनल व राष्ट्रीय युवा महोत्सव की पॉलिसी को सभी के समक्ष उपस्थित कर विचार लिए गए वह पॉलिसी को अंतिम रूप दिया गया भारतीय विश्वविद्यालय संघ की पिछले वर्ष की बैठक के मिनट्स भी सुनिश्चित किए गए वर्ष 2026-27 में होने वाले कार्यक्रमों की सूची पर विचार किया गया वह जोनल व राष्ट्रीय युवा महोत्सव को विश्वविद्यालय को आवंटित किया गया ।
कार्यक्रम के अंत में प्रो.(डॉ.) भावना ग्रोवर, अध्यक्षा, ललित कला संकाय ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं डॉ. सीमा शर्मा और डॉ. निशा सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया।
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