ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा रहा है विश्वविद्यालय : प्रो. संगीता शुक्ला
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद के तत्वावधान में आयोजित दीक्षोत्सव के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 149 विद्यार्थियों को मंगलवार को सम्मानित किया गया। समारोह में मीरपुर, लालपुर, सिखेड़ा, भदौड़ा, बनवारीपुर, डालमपुर एवं लाहोरपुर क्षेत्र के 15 प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। चित्रकला, भाषण, लेखन तथा पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 149 विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने कहा कि भारत प्रतिभाओं का देश है। गांव-गांव और हर विद्यालय में ऐसे बच्चे हैं जिनमें असाधारण क्षमता और सृजनात्मकता विद्यमान है, लेकिन उचित अवसर और मंच के अभाव में उनकी प्रतिभा सामने नहीं आ पाती। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का यह प्रयास केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानने, उनका आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देने का एक सशक्त अभियान है। कुलपति ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। चित्रकला, भाषण, लेखन और पारंपरिक खेल जैसी गतिविधियां बच्चों में रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति कौशल तथा सांस्कृतिक मूल्यों का विकास करती हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के अंतिम पंक्ति तक शिक्षा और प्रतिभा संवर्धन की भावना को पहुंचाने का कार्य करता रहेगा।
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद की अध्यक्ष प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में प्रतिभा और कौशल की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उन्हें सही मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि जब बच्चों को सकारात्मक वातावरण और उचित मंच मिलता है तो वे अपनी क्षमता से सभी को प्रभावित करते हैं। प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता ने कहा कि दीक्षोत्सव का उद्देश्य ग्रामीण विद्यार्थियों के भीतर छिपी रचनात्मक और बौद्धिक प्रतिभाओं को पहचानना तथा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। ऐसे आयोजन बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने के साथ-साथ शिक्षा के प्रति रुचि, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी का भी विकास करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मानित विद्यार्थी भविष्य में अपने विद्यालय, परिवार, समाज और राष्ट्र का नाम रोशन करेंगे।
इस अवसर पर कुलसचिव प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह, चीफ प्रॉक्टर एवं शोध् निदेशक प्रोफेसर वीरपाल सिंह, साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद के समन्वयक प्रोफेसर कृष्णकांत शर्मा डॉक्टर योगेंद्र गौतम, डॉक्टर मुनेश कुमार, डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार, डॉ आशीष कौशिक, डॉक्टर प्रशांत कुमार, डॉक्टर कमल कुमार, अमरपाल आदि मौजूद रहे।


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