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Friday, June 12, 2026

शोभित विश्वविद्यालय में पाँच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल समापन



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। शोभित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी), मेरठ के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ द्वारा “रिसर्च एक्सीलेंस, इनोवेशन एंड एकेडमिक लीडरशिप” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम  का सफल समापन हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेंद्र ने संस्थान की शोध दृष्टि  पर अपने प्रेरणादायी उद्बोधन के साथ किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं शिक्षकों को अपने शोध कार्यों को संस्थान की शोध दृष्टि के अनुरूप संचालित करना चाहिए, जिससे समाज, राष्ट्र एवं वैश्विक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हो सके। उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वी. के. त्यागी ने शोध एवं नवाचार नेतृत्व पर विशेष व्याख्यान देते हुए नवाचार आधारित शोध संस्कृति, बहु-विषयक सहयोग तथा गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. (डॉ.) जयानंद, प्रो-वाइस चांसलर  ने “रिसर्च गवर्नेंस” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने यूजीसी विनियमों, विश्वविद्यालय की पीएच.डी. अध्यादेश, मानक संचालन प्रक्रियाओं , शोध नैतिकता, गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली तथा विश्वविद्यालय की शोध संबंधी श्रेष्ठ प्रथाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की। द्वितीय दिवस पर प्रो. (डॉ.) पी. के. जोशी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने “पब्लिकेशन एवं मैनुस्क्रिप्ट राइटिंग” विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। तृतीय दिवस पर प्रो. (डॉ.) एम. एल. सिंगला, फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, दिल्ली विश्वविद्यालय ने “रिसर्च सुपरविजन” विषय पर शोधार्थियों के प्रभावी मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण की चुनौतियों पर अपने विचार रखे।

चतुर्थ दिवस पर प्रो. (डॉ.) बूटा सिंह सिद्धू, कुलपति, शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह ने गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशन, उपयुक्त जर्नल चयन, प्रकाशन नैतिकता एवं इम्पैक्ट फैक्टर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। समापन दिवस पर प्रो. (डॉ.) अमूल्य के. पांडा, पूर्व निदेशक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी, नई दिल्ली ने “फंडिंग फॉर ट्रांसलेटिंग इनोवेशन” विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि किस प्रकार शोध निष्कर्षों को उद्योग एवं समाज के हित में उपयोगी उत्पादों एवं तकनीकों में परिवर्तित किया जा सकता है। इस पाँच दिवसीय कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न  शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को शोध, नवाचार, प्रकाशन, पर्यवेक्षण एवं शैक्षणिक नेतृत्व के क्षेत्र में नई दृष्टि प्रदान की। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. निधि त्यागी द्वारा किया गया, जबकि डॉ. दिव्या प्रकाश, डॉ. क्षमता चौहान, डॉ. अल्पना जोशी, डॉ. संदीप कुमार एवं डॉ. लोमस तोमर ने सह-समन्वयक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरण एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने शोध उत्कृष्टता, नवाचार एवं अकादमिक नेतृत्व को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को पुनः दोहराया।

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