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Wednesday, June 10, 2026

विकास और विरासत: मोदी युग में नए भारत का नव-उदय

नित्य संदेश

​भारतीय राजनीति में 10 जून 2026 का दिन ऐतिहासिक तिथि के रूप में दर्ज होगा। लगातार तीसरे कार्यकाल के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पंडित जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए देश में सबसे लंबे समय तक चुने जाने वाले राष्ट्रप्रमुख बन जाएंगे। पीएम मोदी का यह कार्यकाल केवल संख्यात्मक उपलब्धि नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के उस अटूट विश्वास का प्रमाण है, जिसने भारत को प्रगति और वैश्विक नेतृत्व के शिखर पर पहुंचाया है। इस शासन की सबसे बड़ी विशेषता रही कि नरेंद्र मोदी ने स्वयं को हमेशा प्रधान सेवक के रूप में प्रस्तुत किया और स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, नारी शक्ति वंदन अधिनियम (33% महिला आरक्षण) तथा मन की बात जैसे अभियानों से शासन को सीधे जन-भागीदारी से जोड़ दिया।

तकनीक और सामाजिक न्याय के अंत्योदय हेतु आर्थिक और सामाजिक न्याय के मोर्चे पर, सरकार ने जनधन-आधार-मोबाइल यानी जैम ट्रिनिटी की त्रिशक्ति से बिचौलियों और भ्रष्टाचार के पुराने तंत्र को समूल नष्ट कर दिया। डिजिटल तकनीक और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सीधे जरूरतमंद के खाते में पहुंच रहा है। इसके फलस्वरूप पिछले एक दशक में लगभग 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी के चक्रव्यूह से बाहर आए हैं।

वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर हर नागरिक को सम्मानित जीवन देने के लिए सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं ने धरातल पर करोड़ों जीवन बदले हैं। मुख्य योजनाओं की पहुंच को हम इन सीधे आंकड़ों से समझ सकते हैं: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (80 करोड़ मुफ्त राशन लाभार्थी), आयुष्मान भारत योजना (55 करोड़ लोगों को ₹5 लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य कवच), प्रधानमंत्री आवास योजना (4 करोड़ से अधिक पक्के मकान), पीएम-किसान निधि (11 करोड़ किसानों को सालाना ₹6,000 की सीधी मदद), जल जीवन मिशन (14 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से जल), उज्ज्वला योजना (10 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन), पीएम सूर्य घर योजना (1 करोड़ घरों को मुफ्त सौर बिजली) और जनधन योजना (50 करोड़ से अधिक बैंक खाते) आदि है।


वही ​बुनियादी ढांचे के निर्माण में वर्तमान भारत ने जो गति पकड़ी है, वह पूरी दुनिया के लिए शोध का विषय है। आज देश में प्रतिदिन लगभग 28 से 30 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हो रहा है, रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण के साथ वंदे भारत जैसी स्वदेशी ट्रेनें दौड़ रही हैं और हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो चुकी है। यूपीआई के माध्यम से आज भारत वैश्विक डिजिटल भुगतान में सबसे आगे है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में पहले जहां केवल 7 एम्स थे, वहीं अब 20 एम्स चालू हो चुके हैं। मेक इन इंडिया की दूरदर्शी नीतियों के चलते भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और देश अब सेमीकंडक्टर (चिप) निर्माण के क्षेत्र में उतरकर वैश्विक स्तर पर आत्मनिर्भर बन रहा है।

वैश्विक मंच पर भारत की विदेश नीति राष्ट्र प्रथम के महामंत्र पर आधारित है, जहां देश बिना किसी महाशक्ति के दबाव में आए स्वतंत्र निर्णय लेता है। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्यपूर्व युद्ध और वैश्विक मंदी के बीच भी भारत ने पश्चिमी प्रतिबंधों की परवाह न करते हुए कच्चे तेल का आयात जारी रखा और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक महाशक्ति बना रहा। जी-20 की सफल अध्यक्षता करके भारत ग्लोबल साउथ की सशक्त आवाज और विश्वमित्र के रूप में उभरा है। यही कारण है कि पीएम मोदी को अब तक 24 से अधिक देशों द्वारा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दिए जा चुके हैं। हाल ही में मई 2026 में उन्हें मिला नॉर्वे का सर्वोच्च सम्मान (ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेदन ऑर्डर ऑफ मेरिट) उनके अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की श्रृंखला में 32वां सम्मान है।

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एक ऐतिहासिक नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा विपरीत परिस्थितियों में होती है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने रिकॉर्ड समय में दो प्रमुख टीकों—पूर्णतः स्वदेशी कोवैक्सीन और भारत में निर्मित कोविशील्ड—का उत्पादन किया और वैक्सीन मैत्री के तहत दुनिया के दर्जनों देशों को टीके भेजकर वसुधैव कुटुंबकम की भावना को चरितार्थ किया।

यह नेतृत्व विकास भी, विरासत भी के संतुलित मंत्र पर चलता है। एक तरफ इसरो ने चंद्रयान, सूर्ययान और गगनयान जैसे ऐतिहासिक अभियानों से अंतरिक्ष में परचम लहराया, तो दूसरी तरफ अयोध्या में भव्य प्रभु श्री राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम व महाकाल लोक का पुनरुद्धार और योग-आयुर्वेद को वैश्विक मान्यता दिलाकर सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित किया है।

इसी तरह, रक्षा क्षेत्र आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा है। मेक इन इंडिया के तहत आईएनएस विक्रांत और तेजस जैसे हथियारों से रक्षा आयात कम हुआ है, वहीं रक्षा निर्यात ₹21,000 करोड़ के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को पार कर चुका है। सीडीएस पद का गठन, अटल व सेला टनल का निर्माण और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति ने देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को अभेद्य बनाया है।

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अंततः, आज की यह ऐतिहासिक तिथि कोई ठहराव नहीं, बल्कि विकसित भारत @2047 के विराट संकल्प की ओर बढ़ने वाले एक अनंत रथ का नव-प्रस्थान है। आज का न्यू इंडिया एक हाथ में इसरो की आधुनिकतम तकनीक और दूसरे हाथ में अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का गौरव थामे हुए वैश्विक मंच पर महाशक्ति के रूप में खड़ा है। आगामी पीढ़ियां मोदी युग को इतिहास के पन्नों में राष्ट्र के सांस्कृतिक अरुणोदय और वैश्विक महाशक्ति के रूप में उसके सिंहनाद के रूप में याद रखेंगी।



— सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'

संपादक, नित्य संदेश, मध्यप्रदेश 

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