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Wednesday, June 10, 2026

सुभारती लॉ कॉलेज की 17वीं मूट कोर्ट प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाया न्यायिक कौशल



 

22 टीमों के 44 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, आरती-व्योम की टीम बनी विजेता, आयुष-देवांश रहे उपविजेता


नित्य संदेश ब्यूरो


मेरठ। स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ द्वारा समसामयिक भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर आधारित 17वीं मूट कोर्ट प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन सुभारती लॉ कॉलेज के निदेशक राजेश चंद्र (पूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) के निर्देशन तथा प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, संकायाध्यक्षा एवं प्रधानाचार्या, सुभारती लॉ कॉलेज के संरक्षण में संपन्न हुआ।

 

कार्यक्रम का उद्देश्य विधि विद्यार्थियों को न्यायालयीन कार्यप्रणाली, कानूनी अनुसंधान, तार्किक विश्लेषण एवं प्रभावी वकालत कौशल का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने भ्रष्टाचार निवारण कानूनों, संवैधानिक अधिकारों और समकालीन कानूनी चुनौतियों पर अपने ज्ञान एवं तर्कशक्ति का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मूट कोर्ट संगठन की शिक्षक समन्वयक डॉ. आफरीन अलमास एवं छात्र समन्वयक ओम ठाकुर ने बताया कि प्रतियोगिता में 22 टीमों के कुल 44 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया। प्रारंभिक दौर में प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए निर्णायक मंडल में श्री आशुतोष देशवाल, श्री पार्थ मल्होत्रा, सुश्री मुस्कान श्रीवास्तव, श्रीमती शिवानी तथा श्री अनुराग चौधरी शामिल रहे।


सेमीफाइनल राउंड में विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र-छात्राओं एवं विधि विशेषज्ञों ने निर्णायक की भूमिका निभाई। इनमें अधिवक्ता शेहला चौधरी (भारत का सर्वोच्च न्यायालय), अधिवक्ता आशुतोष तिवारी (जिला न्यायालय, मेरठ), अधिवक्ता सुजीत सिंह तथा अधिवक्ता सूर्यांश त्यागी शामिल रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए एवं 19, सरकारी अधिकारियों को प्राप्त कानूनी संरक्षण, तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त निजता के अधिकारऔर भ्रष्टाचार की जांच के बीच उत्पन्न होने वाले कानूनी टकराव से जुड़े जटिल प्रश्न पूछे।


फाइनल राउंड की सुनवाई के लिए गठित प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल में प्रो. डॉ. रीना बिश्नोई, डीन, सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ; प्रो. (डॉ.) वैभव गोयल, निदेशक,  अनुसंधान एवं विकास, स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय; तथा डॉ. प्रेम, प्रोफेसर, विधि संकाय, सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ शामिल रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों से भारतीय न्याय संहिता, भारतीय संवैधानिक विधि तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 17ए एवं 19 से संबंधित गहन प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर प्रतिभागियों ने प्रभावशाली तर्कों और कानूनी दृष्टांतों के साथ प्रस्तुत किया।

 

प्रतियोगिता के अंतिम परिणामों में आरती एवं व्योम की टीम को सर्वश्रेष्ठ टीम (Best Team) घोषित किया गया, जबकि आयुष एवं देवांश की टीम उपविजेता रही। प्रतिभागियों की प्रभावशाली दलीलों, कानूनी समझ और न्यायिक प्रस्तुतीकरण की निर्णायकों ने सराहना की।

 

इस अवसर पर प्रतियोगिता के सफल संचालन में सृष्टि, लवी, आराध्या, सिल्विया, सना श्री, चेतन, सादिका बंसल तथा जॉर्ज सहित अनेक छात्र-छात्राओं का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को विधिक शिक्षा के व्यावहारिक पक्ष से जोड़ते हुए उन्हें भविष्य के सक्षम अधिवक्ता एवं न्यायविद बनने की दिशा में प्रेरित किया।


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