नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। आर्य समाज संचार नगर, इंदौर एवं गुरु विरजानन्द वैदिक ट्रस्ट, इंदौर के तत्वावधान में 50वां हिंदू सर्वजातीय परिचय सम्मेलन संतोष सभागृह, चरक हॉस्पिटल, रानी सती गेट, इंदौर में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में लगभग 35–40 वैवाहिक संबंध प्रारंभिक रूप से निश्चित हुए।
आर्य समाज संचार नगर द्वारा वर्ष 2004 से निरंतर हिंदू सर्वजातीय परिचय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस माध्यम से अब तक हजारों वैवाहिक संबंध स्थापित हो चुके हैं। इस सम्मेलन की विशेषता यह है कि इसमें अविवाहित युवक-युवतियों के साथ-साथ विधवा, विधुर, तलाकशुदा, अधिक आयु के, प्रौढ़ तथा दिव्यांग विवाह योग्य प्रत्याशियों को भी सम्मानपूर्वक सहभागिता का अवसर प्रदान किया जाता है। आशीर्वाद श्रीमती विजया बलराज सबलोक जी ने दिया।
इस अवसर पर "हिंदू सर्वजातीय परिणय स्मारिका" का भी विमोचन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि आचार्य योगाचार्य उमाशंकर महाराज (सूरत) ने अपने उद्बोधन में कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती के अनुसार "वर एवं वधू का चयन गुण, कर्म और स्वभाव के आधार पर होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि गत 22 वर्षों से डॉ. आचार्य भानु प्रताप वेदालंकार द्वारा इस सम्मेलन का सफल आयोजन समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय कार्य है।
सम्मेलन में प्रकाशित हिंदू सर्वजातीय परिणय स्मारिका में लगभग 800 युवक-युवतियों के बायोडाटा एवं रंगीन फोटो प्रकाशित किए गए। मध्यप्रदेश के अतिरिक्त छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, बिहार आदि राज्यों से लगभग 300 युवक-युवतियों ने मंच से अपना परिचय दिया। इनमें 40 से 60 वर्ष आयु वर्ग के अनेक विवाह योग्य प्रत्याशियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
सम्मेलन के संचालक डॉ. आचार्य भानु प्रताप वेदालंकार ने बताया कि वर्ष 2004 से 2026 तक निरंतर इस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से सैकड़ों परिवारों का सफल वैवाहिक जीवन प्रारंभ हुआ है।
कार्यक्रम की सफलता में राकेश शास्त्री, अशोक शास्त्री, विनायक राजपूत, सीमा नायक, विष्णु आर्य (झारखंड) प्रवेश देवड़ा, तथा श्रीमती गायत्री चौहान का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में श्रीमती गायत्री सोलंकी ने आभार व्यक्त किया।

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