नित्य संदेश ब्यूरो
भोपाल। साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग, भोपाल द्वारा कैलेण्डर वर्ष 2024 के मध्यप्रदेश की छः बोलियों (मालवी, निमाड़ी, बघेली, बुंदेली, भीली और गोंडी) के साहित्यिक कृति पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है।
प्रति पुरस्कार रुपये 51,000/- (इक्यावन हजार) के साथ शाॅल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति के साथ रचनाकारों को अलंकृत किया जाता है। साहित्य अकादमी के निदेशक डाॅ. विकास दवे ने बताया कि कुछ पुरस्कारों हेतु दो श्रेष्ठ कृतियों को संयुक्त रूप से जूरी द्वारा चयनित किया गया है।
(1) ‘मालवी’ के लिए संत पीपा स्मृति पुरस्कार श्रीमती सुषमा दुबे-इंदौर की कृति ‘गुड़धाणी’ एवं श्री नंद किशोर चैहान-इंदौर की कृति ‘बुलावो’,
(2) ‘निमाड़ी’ के लिए संत सिंगा जी स्मृति पुरस्कार श्री सौरभ लाड़-इंदौर की कृति ‘गरीब मनुस का उल्टा पांय’,
श्री सौरभ लाड़ को इसी कृति पर संयुक्त रूप से ईसुरी सम्मान देने की भी निर्णायक मंडल ने स्वीकृति दी थी। एक ही वर्ष में दोनों सम्मान एक व्यक्ति को नहीं दिये जा सकते इसलिए श्री सौरभ लाड़ को ईसुरी संयुक्त सम्मान न देते हुए केवल निमाड़ी का संत सिंगा जी सम्मान ही दिया जाएगा।
(3) ‘बघेली’ के लिए श्री विश्वनाथ सिंह जूदेव स्मृति पुरस्कार श्री रमाकांत द्विवेदी-सीधी की कृति ‘देखा बोलि देब हम’ एवं श्रीमती सुषमा मुनीन्द्र-सतना की कृति ‘लाभ-शुभ’,
(4) ‘बुंदेली’ के लिए श्री छत्रसाल स्मृति पुरस्कार डाॅ. हरिकृष्ण हरि प्रजापति-दतिया की कृति ‘माटी के गीत’ एवं डाॅ. रंजना शर्मा-भोपाल की कृति ‘बुंदेली रामायण मोरे राम’ को दिया गया है।
(5) ‘भीली’ टंट्या भील स्मृति पुरस्कार हेतु प्रविष्टि अप्राप्त।
(6) ‘गोंडी’ रानी दुर्गावती स्मृति पुरस्कार हेतु कोई भी कृति प्रविष्टि के रूप में प्राप्त नहीं हुई।
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