नित्य संदेश, इंदौर। "एक सर्वगुण संपन्न शिक्षक ही समाज के लिए योग्य शिष्य बना सकता है।" यह उद्गार प्रसिद्ध लेखक, नाट्य कर्मी व अभिनेता योगेश सोमण ने अपने गुरु बालनाट्य कर्मी श्री प्रकाश पारखी सर के सम्मान समारोह में व्यक्त किये।
वे मुक्त संवाद साहित्यिक समिति द्वारा आयोजित बालनाट्य महोत्सव के सम्मान व समारोह शुभारंभ में संबोधन दे रहे थे। इस अवसर पर इंदोर के सुप्रसिद्ध नाट्यकर्मी श्री श्यामकांत खोंडके को भी सम्मानित किया गया। अस्वस्थता के बावजूद वे वर्षो से बच्चो को रंगकर्म का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
इस अवसर पर उपस्थित सांसद शंकर ललवानी ने बच्चों को नाट्यकला का प्रशिक्षण देने के लिये मुक्त संवाद की सराहना की।
बाल नाट्य समारोह का शुभारंभ प्रात: 10 बजे उद्योगपति श्रीमती हेमलता ताम्हणे व श्रीमती अर्चना चितळे के द्वारा किया गया। दिनभर चले इस बाल नाट्य महोत्सव में प्रदर्शित बारह बाल नाटकों में 160 से अधिक बच्चे सम्मिलित हुए। आयोजन का उद्देश्य बाल नाट्य के माध्यम से बच्चों में मातृभाषा के प्रति अनुराग जगाना तथा उन्हें अपने इतिहास एवं संस्कृति से जोड़ना है। लगभग सभी नाटक संदेशात्मक थे, जहां कई निर्देशको ने पौराणिक या ऐतिहासिक पात्रों का चयन किया तो कुछ निर्देशको ने सामाजिक संदेश देने का प्रयास किया।
नाटक 'चला कैदेतुन सुटूया' एवं 'ए आय सपोर्ट' में मोबाईल एवं इंटरनेट से होने वाले लाभ एवं हानि को बहुत ही व्यंगात्मक रूप से दर्शाया गया था।
अपने उद्बोधन मे श्री प्रकाश पारखी द्वारा बच्चों को बाल नाट्य के कुछ गुर सिखाते हुए, स्वयं के सम्मान के लिए धन्यवाद दिया। सभी बाल कलाकारों द्वारा सामूहिक रुप से संपूर्ण वंदेमातरम् गीत का गायन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. बागेश्री जोशी ने किया। अतिथि स्वागत निलेश हिरपाठक, अनिल मोडक, मंजुषा रेडगांवकर ने किया। आभार प्रदर्शन पंकज नाम जोशी ने किया।






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