Breaking

Your Ads Here

Monday, June 8, 2026

अहंकार मानव का सबसे बड़ा शत्रु, ज्ञान सबसे बड़ा मित्र : योगाचार्य अमरपाल

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नित्य योग शिविर के आठवें दिन योगाचार्य अमरपाल ने साधकों को योग के आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक पक्षों से अवगत कराते हुए कहा कि अहंकार मानव जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है, जबकि ज्ञान उसका सबसे बड़ा मित्र है। 

उन्होंने बताया कि जब तक मनुष्य अहंकार के बंधन में बंधा रहता है, तब तक वह आत्मिक उन्नति और वास्तविक सुख की प्राप्ति नहीं कर सकता। योग साधना का प्रमुख उद्देश्य मनुष्य को अहंकार से मुक्त कर आत्मबोध की ओर अग्रसर करना है। योगाचार्य अमरपाल ने महर्षि घेरण्ड द्वारा वर्णित योग दर्शन का उल्लेख करते हुए बताया कि महर्षि घेरण्ड ने योग की इच्छा रखने वाले राजा को उपदेश दिया था कि योग परम बल है। ज्ञान मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र है तथा अहंकार उसका सबसे बड़ा शत्रु। उन्होंने कहा कि योग मार्ग पर अग्रसर होने के लिए सर्वप्रथम शरीर एवं मन की शुद्धि आवश्यक है। शोधन क्रियाओं के माध्यम से शरीर की 72,000 नाड़ियों का शुद्धिकरण होने के पश्चात साधक आसन, प्राणायाम तथा प्रत्याहार का अभ्यास करता है। इसके बाद ध्यान के माध्यम से मन को एकाग्र कर समाधि की अवस्था में पहुंचा जा सकता है। यही अवस्था साधक को परमपिता परमेश्वर से जोड़ती है तथा मोक्ष प्रदान करने वाली मानी गई है। 

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली के कारण लोगों में कमर दर्द, गर्दन दर्द, मोटापा तथा मानसिक तनाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से शिविर में लाइफस्टाइल संबंधी कमर दर्द निवारण योगाभ्यास श्रृंखला का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर साधकों को कमर दर्द से राहत प्रदान करने वाले विभिन्न योगाभ्यासों की जानकारी दी गई तथा उनके नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित किया गया। योग सत्र का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं प्रार्थना के साथ हुआ। इसके पश्चात साधकों ने सूक्ष्म व्यायाम, सूर्य नमस्कार, बद्धकोणासन, नाड़ी शोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम सहित विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास किया। 

योगाचार्य अमरपाल ने प्रत्येक अभ्यास के वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्यवर्धक लाभों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि नियमित योगाभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास एवं सकारात्मक ऊर्जा का भी विकास करता है। शिविर में उपस्थित साधकों ने पूरे उत्साह एवं अनुशासन के साथ योगाभ्यास किया तथा योगाचार्य द्वारा दिए गए आध्यात्मिक एवं स्वास्थ्य संबंधी संदेशों को आत्मसात किया। कार्यक्रम में योग विज्ञान विभाग के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. शालिनी धामा, डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. विवेक त्यागी, अंजू मलिक, डॉ. कमल शर्मा, आकाश तोमर, ज्योति सिंह, पुष्पेंद्र यादव, नंदिनी, राकेश कुमार, अरुण सिसोदिया सहित अनेक योग साधक एवं विभागीय सदस्य उपस्थित रहे।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here