- प्रकरण में एक और मुकदमे की तैयारी , 11 मार्च को हाई कोर्ट में होनी है मामले की सुनवाई
सलीम सिद्दीकी
नित्य संदेश, मेरठ। विवाद वक्फ मनसबिया का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं। मेरठ की मनसबिया को उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा अपने अधीन करने एवं यहां प्रशासक और कंट्रोलर की नियुक्ति से उठा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। यहां पूर्व में तैनात किए गए तीन कर्मचारियों को अचानक हटाए जाने पर पूर्व मुतवल्ली पक्ष ने सवाल खड़े किए हैं।
इस पक्ष का कहना है कि जब ज़फ़र सज्जाद के पास प्रशासक का 'वैध' चार्ज ही नहीं है तो उन्होंने उक्त तीनों कर्मचारियों को किस आधार पर हटाया। पूर्व मुतवल्ली पक्ष ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि वह इस मामले में भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और धोखाधड़ी का केस दर्ज करवाएंगे। बता दें कि पूर्व मुतवल्ली दानिश जाफरी की अप्रूवल एप्लिकेशन पर भी अभी तक उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अपना स्टैंड क्लियर नहीं किया है। यहां यह भी काबिल ए गौर है कि इस पूरे मामले में हाई कोर्ट में 11 मार्च की तारीख सुनवाई के लिए प्रस्तावित है।
बता दें कि हाई कोर्ट में चल रहे इस केस में पूर्व मुतवल्ली पक्ष के दावे में सवाल किया गया है कि आखिर शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन को यह अधिकार किसने दिया कि वह धारा 65 के अंतर्गत अकेले ही कार्यवाही कर दें। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इस दावे पर कोर्ट संबंधित पक्ष से चेयरमैन के अधिकार को लेकर सवाल भी कर चुका है। चेयरमैन द्वारा स्वयं के स्तर पर प्रशासन की नियुक्ति पर अब रार बढ़ती जा रही है।
पूरे मामले में डीएमओ कार्यालय सक्रिय / वक़्फ़ मनसबिया प्रकरण में मेरठ से लखनऊ तक हलचल है। इस मामले में स्थानीय जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रूहेल आजम भी सक्रिय हैं। इस प्रकरण में डीएमओ (जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी) ने भी मनसबिया के प्रशासक बनाए गए उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के विधि सहायक ज़फ़र सज्जाद को पत्र लिखा है। इस पत्र में पूर्व मुतवल्ली दानिश जाफरी के पत्र का हवाला देते हुए अवलोकन करने की बात कही गई है। इसी पत्र में मनसबिया की खराब आर्थिक स्थिति और छात्राओं के मैस का मुद्दा भी शामिल है।

No comments:
Post a Comment