- मोबिलाइजेशन प्रभावित होने की भी आशंका
सलीम सिद्दीकी
नित्य संदेश, मेरठ। खिलते बचपन पर धनाभाव का ग्रहण लग गया है।पोलियो और टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के सफल संचालन में अब बजट बाधा बनने लगा है। विभिन्न एजेंसियों द्वारा हाथ खींचे जाने से स्वास्थ्य कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग से लेकर मोबिलाइजेशन तक पर संकट आ खड़ा हुआ है।
स्वास्थ विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार मेरठ सहित प्रदेश के कई जिलों में गावी नामक संस्था ने अब ज़ीरो डोजर पर काम शुरू कर दिया है। यानि कि जिन बच्चों को पेंटावेलेंट -1 और डीपीटी - 1 की डोज नहीं मिल पाई है। उन पर फोकस होगा। उधर यूनिसेफ के एसएम नेट में भी बाइंडअप (कार्य समाप्त) की सुगबुगाहट के बीच एसएम नेट से जुड़े कई बीएमसी (ब्लॉक मोबिलाइजेशन कॉर्डिनेटर) और कुछ डीएमसी (डिस्ट्रिक्ट मोबिलाइजेशन कॉर्डिनेटर) अब नए ठौर की तलाश में हैं। इनमें से कई ने गावी संस्था का रुख किया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार एसएम नेट में डीएमसी और बीएमसी का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिए जाने की चर्चा है।
इसके अलावा मेरठ में डब्ल्यूएचओ (एनपीएसपी) के कुछ मॉनिटर्स और यूनिसेफ (एसएम नेट) के कुछ बीएमसी ने भी गावी को ज्वॉइन किया है। हालांकि एनपीएसपी और यूनिसेफ से जुड़े रहे कुछ पूर्व मॉनिटर्स और पूर्व बीएमसी का मानना है कि चूंकि गावी के मुकाबले डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ वैश्विक स्तर की संस्था है, लिहाज़ा मोबिलाइजेशन से लेकर मॉनिटरिंग के स्तर में कुछ गिरावट की आशंका भी हो सकती है। इन लोगों ने यह दलील भी दी है कि जब मॉनिटर को टीकाकरण के दौरान प्रत्येक कार्य दिवस में 4 हाउस तो हाउस (40 घरों का निरीक्षण) पूर्ण करने होंगे तो कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है।

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