नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में सोमवार को “अल्गल रिसर्च, बायोडायवर्सिटी और बायोटेक्नोलॉजी” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा यूजीसी-एमएमटीटीसी, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद विभागाध्यक्ष डॉ. रमाकांत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला तथा शैवाल अनुसंधान के महत्व और इसके विभिन्न उपयोगों के बारे में जानकारी दी। संगोष्ठी में कीनोट स्पीकर के रूप में प्रोफेसर अमरीक सिंह अहलूवालिया ने अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में विज्ञान एवं तकनीकी विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली की सलाहकार एवं साइंटिस्ट-जी डॉ. नम्रता पाठक ने वैज्ञानिक शोध और जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीन कार्यों पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता के रूप में ब्रिघम एंड विमेन्स हॉस्पिटल, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से जुड़े डॉ. योगेश चंदर ने “ब्रॉड-स्पेक्ट्रम होस्ट-डायरेक्टेड थैरेपी: प्रभावशीलता और प्रतिरोध के जोखिम का संतुलन” विषय पर व्याख्यान देते हुए आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में नई उपचार पद्धतियों और उनके महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
इसी क्रम में वियतनाम के वैज्ञानिक डॉ. नयांग बाउ कवेक ने “फू होई कम्यून, डोंग नाई प्रांत में उगाई जाने वाली कैमेलिया चाय की विभिन्न किस्मों की आनुवंशिक विविधता का एसआरएपी मार्कर के माध्यम से आकलन” विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के शोध से पौधों की विविधता को समझने और उनकी गुणवत्ता में सुधार करने में सहायता मिलती है। तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा शैवाल की विविधता, जैव-ईंधन उत्पादन तथा पर्यावरण संरक्षण में इसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस दौरान शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रस्तुति के माध्यम से अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। संगोष्ठी में जय श्री रावत सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभाग के सभी शिक्षकगण भी मौजूद रहे। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। यह संगोष्ठी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुई।
No comments:
Post a Comment