नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। तीसरे दिन कथाव्यास प्रो. सुधाकराचार्य के आवास पर मयूरविहार में सामवेद की चतुर्थ कथा में त्रिपाठी जी ने बताया कि इन्द्र गौर वर्ण के हैं। आज के ऋषि हैं भर्ग, मेधातिथी, वशिष्ठ व भरद्वाज आदि। बारह आदित्यों व इन्द्र की स्तुति।
हे शचीपते! आप हमारी रक्षा कीजिये। हर प्रकार की रक्षा करने वाला केवल एक ही देवता है इन्द्र। हे इन्द्र! जो हमारा भोजन है वो हमें दीजिए। उसे कोई और ग्रहण ना करे। मित्र एवं वरूण देवता की मदद से इन्द्र हमारा काम करें। मरुतों की मदद से हमारी रक्षा करो। व्रत्र से हमारी रक्षा करो। हे इन्द्र! हमारे चित्त में काम करने की वृत्ति ऐसे भरो जैसे माता पिता अपने पुत्र की बुद्धि में भरते हैं। अपने सभी हुनर अपने पुत्र को सिखा देते हैं व अपनी सारी सम्पत्ति उसको दे देते हैं। हे इन्द्र! ये जो नाहुषि प्रजा है इसको बुद्धिमान बनाओ। नहुष नें स्वर्ग पर अधिकार प्राप्त कर शुचि पर भी अधिकार जताया तो शुचि के श्राप से नहुष स्वर्ग से गिरकर अजगर बन गये व कृष्ण द्वारा उद्धार को प्राप्त हुये। हे इन्द्र! जो वीर लोग हैं उनके लिए अन्न दो। इन्द्र सबकी सुरक्षा करते हैं सबको आत्मनिर्भर बनाते हैं।

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