-हमारी आवाज़ और प्रो. असलम जमशेदपुरी के हिंदी नॉवेल
“धनौरा” का विमोचन
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। फ़िराक़ बीसवीं सदी के एक महान ग़ज़ल शायर हैं।
फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी में भारत अपनी पूरी शान से चमकता है। फ़िराक़ की ग़ज़ल में
जो दर्द है, वह उनके उस्ताद का मज़हब है, लेकिन यह भी एक सच है कि फ़िराक़ के साथ इंसाफ़
नहीं हुआ, उन्हें वह मुकाम नहीं मिला जिसके वे हक़दार थे। ये शब्द अंतर्राष्ट्रीय ख्याति
प्राप्त शोधकर्ता एवं आलोचक डॉ. तकी आबिदी [कनाडा] के, जो उर्दू विभाग में आयोजित एक
दिवसीय फिराक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार “फिराक गोरखपुरी: शेर ओ अदब” में अपना मुख्य वक्तव्य
दे रहे थे।
मौलाना मुहम्मद जिब्रील ने पवित्र कुरान की तिलावत से
कार्यक्रम की शुरुआत की। नात उज़्मा मेहंदी ने पेश की। उद्घाटनसत्र की अध्यक्षता प्रो.
असलम जमशेदपुरी ने की। स्वागत भाषण डॉ. आसिफ अली ने दिया, डॉ. इरशाद स्यानवी ने फिराक
गोरखपुरी का परिचय और संचालन डॉ. शादाब अलीम ने किया। इस दौरान विभाग की पत्रिका “हमारी
आवाज़” और प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी के हिंदी उपन्यास “धनौरा” का विमोचन किया गया। पत्रिका
पर डॉ. आसिफ अली और उपन्यास धनौरा पर प्रोफेसर प्रज्ञा पाठक और डॉ. विद्या सागर, अफाक
अहमद खान, वीर पाल सिंह और आशाराम ने अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर डॉ. ज़हीर
अहमद, जमील सैफी, वीर पाल कपासिया, डॉ. नसरीन, जीशान खान, मुहम्मद शौक़ीन अली, अफ़सर
अली, मदीहा असलम, मुहम्मद यामीन खान, राशिद खान, साइमा, कंवर पाल, बीरपाल, सरदार सिंह,
भारत भूषण शर्मा, बीबी शर्मा, नुज़हत अख्तर, डॉ. फराह नाज़, ईसा राणा सहित बड़ी संख्या
में स्टूडेंट्स और शहर के गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया।
धनौरा के बारे में क्या कहा जमशेदपुरी ने
प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने कहा कि इस नॉवेल के तीन एडिशन
उर्दू में पब्लिश हो चुके हैं, और चौथा भी जल्द ही आने वाला है। इस नॉवेल के किरदार
बिल्कुल सच्चे हैं। मुझे बहुत खुशी है कि मैं अपने गांव के लिए कुछ कर पाया। यह गांव
सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि एक तहज़ीब है। इस गांव के किरदार सिर्फ़ इस नॉवेल में ही
नहीं हैं, बल्कि मैंने अलग-अलग कहानियों से कई किरदार लिए हैं। धनौरा ने न सिर्फ़ मुझे
पाला-पोसा बल्कि, इसने मुझे बनाया है।

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