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Friday, October 16, 2026

हम सभी की आँखें एक जैसी होती हैं, लेकिन देखने का दृष्टिकोण सबका अलग-अलग होता है : प्रो. एच. एस. सिंह

तीन दिवसीय जश्न-ए-सर सैयद समारोह में डॉ. ज़की तारिक और स्मिता शर्मा सर सैयद राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित

नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। सर सैयद ने 1857 के बाद ‘असबाब-ए-बग़ावत-ए-हिंद’ लिखकर अंग्रेज़ों को आईना दिखाया। उन्होंने अंग्रेज़ों को बताया कि उनकी नीतियों में क्या कमियाँ थीं। मैं पिछले 42 वर्षों से अध्यापन कर रहा हूँ। हम सभी की आँखें एक जैसी होती हैं, लेकिन देखने का दृष्टिकोण सबका अलग-अलग होता है। प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी जब से इस विश्वविद्यालय में आए हैं, वे चीज़ों को अलग दृष्टि से देखते, परखते और प्रस्तुत करते हैं।

ये विचार प्रोफेसर एच. एस. सिंह ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के उर्दू विभाग में आयोजित तीन दिवसीय जश्न-ए-सर सैयद समारोह के एक सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि नफ़रत का जवाब प्रेम से देना चाहिए। मनुष्य की पहचान उसके चरित्र से होती है। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी महान शिक्षाविद् और कौम के हितैषी सर सैयद अहमद ख़ाँ की जयंती के अवसर पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के उर्दू विभाग में तीन दिवसीय जश्न-ए-सर सैयद समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. हाशिम रज़ा ज़ैदी ने की। 

मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर एच. एस. सिंह, पूर्व कुलपति, शाह कम्बरी देवी विश्वविद्यालय, सहारनपुर उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रोफेसर ए. के. चौबे, पूर्व अध्यक्ष, प्राणिविज्ञान विभाग तथा डॉ. अरशद इक़बाल ने सहभागिता की। स्वागत भाषण डॉ. शादाब अलीम ने दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आसिफ अली ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. इरशाद स्यानवी ने प्रस्तुत किया।
सर सैयद शोधार्थी संगोष्ठी का आयोजन
इससे पहले आज के कार्यक्रमों की शुरुआत उर्दू विभाग के प्रेमचंद सेमिनार हॉल में आयोजित सर सैयद शोधार्थी संगोष्ठी से हुई। संगोष्ठी के दो सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों की अध्यक्षता डॉ. ज़की तारिक, डॉ. परवीन, आफ़ाक़ अहमद ख़ाँ, हाजी सलीम सैफ़ी, बेगम शहनाज़ अहमद तथा मोहम्मद अशरफ़ रिज़वी ने की।

संगोष्ठी में शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए नमरा ने ‘उर्दू के विकास में अलीगढ़ आंदोलन का योगदान’, शाह-ए-ज़मन ने ‘सर सैयद एक पाठालोचक के रूप में’, शाकिर मतलूब ने ‘सर सैयद की साहित्यिक सेवाएँ’, डॉ. फ़रहा नाज़ ने ‘साहित्य और समाज के विकास में सर सैयद की भूमिका’, ताहिरा परवीन ने ‘सर सैयद: कौम के सुधारक’, मोहम्मद आबिद अली क़ासमी ने ‘सर सैयद का इतिहास संबंधी दृष्टिकोण: विशेष रूप से आसार-उस-सनादीद के संदर्भ में’, नायाब ने ‘सर सैयद के सहयोगी’ तथा महविश ने ‘सर सैयद का शैक्षिक दृष्टिकोण’ विषयों पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।

सर सैयद लेखन प्रतियोगिता आयोजित
इसी दौरान सर सैयद लेखन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें एम.एम.यू. स्कूल, अकला ख़ानपुर; एच.बी.यू.एम. मॉडल स्कूल, शाहपीर गेट, मेरठ; न्यू होराइज़न पब्लिक स्कूल; डॉ. ज़ाकिर हुसैन अकादमी; हमीदिया गर्ल्स हाई स्कूल; मेरठ गर्ल्स इंटर कॉलेज, हुमायूँ नगर; ख़ुशबू पब्लिक स्कूल; इस्माइल पब्लिक स्कूल, गुज़री बाज़ार; हैदर पब्लिक स्कूल तथा श्यामनगर स्कूल के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

प्रतियोगिता के समूह ‘ए’ में एम.एम.यू. स्कूल के मोहम्मद ज़ाहिद ने प्रथम, मेरठ गर्ल्स इंटर कॉलेज की आनिया ने द्वितीय तथा इस्माइल पब्लिक स्कूल की अशमीरा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। समूह ‘बी’ में एम.एम.यू. स्कूल के मोहम्मद अम्मार ने प्रथम, मेरठ गर्ल्स इंटर कॉलेज की समिया ने द्वितीय तथा हैदर पब्लिक स्कूल की फ़ातिमा फ़ुरक़ान ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। हमीदिया स्कूल की अक्षरा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए आफ़ाक़ अहमद ख़ाँ ने कहा कि सभी शोधपत्र बहुत अच्छे थे और इन्हें पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित किया जाना चाहिए। सर सैयद किसी एक समुदाय के पक्षधर नहीं थे। उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों को भारत की दो सुंदर आँखें बताया था। यदि इनमें से किसी एक में भी किसी प्रकार की कमी आ जाए, तो भारत की सुंदरता प्रभावित होगी।

उन्होंने कहा कि सर सैयद अहमद ख़ाँ ने अपने घर के बर्तन तक बेचकर साहित्यिक यात्राएँ कीं। उन्होंने केवल अलीगढ़ में ही नहीं, बल्कि जहाँ भी गए, वहाँ संस्थाओं की स्थापना की। सर सैयद ने साइंटिफिक सोसाइटी, तहज़ीब-उल-अख़लाक़ और आसार-उस-सनादीद जैसी रचनाओं एवं संस्थाओं के माध्यम से समाज को जागरूक करने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया।

सर सैयद राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह
शाम चार बजे से पुरस्कार समारोह का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मोहम्मद ईसा राना द्वारा पवित्र क़ुरआन के पाठ से हुई। इसके बाद अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित किया और पुष्पों के माध्यम से उनका स्वागत किया गया। इस अवसर पर फ़रहत अख़्तर ने अपनी मधुर आवाज़ में ग़ज़ल प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

समारोह में दो पुरस्कार प्रदान किए गए। सर सैयद राष्ट्रीय पुरस्कार (सामाजिक सेवा) मेरठ स्थित दी अकादमी, एम.एस.एम. की इकाई की अध्यक्ष श्रीमती स्मिता शर्मा को तथा सर सैयद राष्ट्रीय पुरस्कार (साहित्यिक सेवा) नोएडा के प्रसिद्ध शायर एवं आलोचक डॉ. ज़की तारिक को प्रदान किया गया। पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं का परिचय डॉ. फ़रहत ख़ातून तथा डॉ. आफ़ाक़ अहमद ख़ाँ ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर दी अकादमी, एम.एस.एम., मेरठ की अध्यक्ष स्मिता शर्मा ने कहा कि वे उर्दू विभाग और उससे जुड़ी संस्थाओं की हृदय से आभारी हैं, जिन्होंने एक महान व्यक्तित्व के नाम पर उनकी सेवाओं को सम्मानित किया। सर सैयद ने स्वयं समाज के लिए बहुत कुछ किया था। उन्होंने कहा कि इस सम्मान से प्रेरित होकर वे अपने कार्यक्षेत्र में और अधिक परिश्रम करेंगी।

पुरस्कार प्राप्त करने के बाद डॉ. ज़की तारिक ने कहा कि उनके लिए यह अवसर और सर सैयद पुरस्कार अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। जिस विश्वविद्यालय से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की, जहाँ उनका बौद्धिक विकास हुआ और जिस महान व्यक्तित्व सर सैयद को उन्होंने अपना आदर्श माना, उनके नाम पर सम्मान प्राप्त करना उनके लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने इसके लिए उर्दू विभाग के सभी सदस्यों, विशेष रूप से प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी, पुरस्कार समिति तथा सर सैयद एजुकेशनल सोसाइटी के सभी सदस्यों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

प्रसिद्ध कथा-साहित्य आलोचक ख़ुर्शीद हयात ने कहा कि वे तीन दिवसीय जश्न-ए-सर सैयद समारोह के आयोजन के लिए प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हैं। आधुनिक उर्दू गद्य के प्रवर्तक सर सैयद की सामाजिक जागरूकता तथा उनकी शैक्षिक, साहित्यिक और वैज्ञानिक सेवाओं को एक साथ प्रस्तुत करना आसान कार्य नहीं है।

प्रोफेसर ए. के. चौबे ने कहा कि ब्रिटिश शासन के समय ‘सर’ की उपाधि प्राप्त करना बहुत बड़ी बात थी। आधुनिक शिक्षा के संबंध में सर सैयद की सोच अत्यंत वैज्ञानिक थी। मुस्लिम समाज में पहले शिक्षा की स्थिति बहुत खराब थी, लेकिन आज विशेष रूप से मुस्लिम लड़कियाँ भी बड़ी संख्या में शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। यह कहीं न कहीं सर सैयद के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सर सैयद ने जो शैक्षिक और साहित्यिक सेवाएँ कीं, वे अनुकरणीय हैं।

डॉ. अरशद इक़बाल ने कहा कि वे पिछले 24 वर्षों से देख रहे हैं कि उर्दू विभाग जिस कुशलता से सर सैयद के मिशन और दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है, वैसा उदाहरण दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता। सर सैयद द्वारा स्थापित संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी आज दुनिया भर में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने कहा कि सर सैयद का संदेश बहुत सरल है। आप जहाँ भी हैं और जिस भी क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं, वहाँ अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाएँ। यही सर सैयद का संदेश है।

सर सैयद के कार्यों से अनेक परिवारों को मिली रोशनी: डॉ. हाशिम रज़ा ज़ैदी
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. हाशिम रज़ा ज़ैदी ने कहा कि सर सैयद के कार्यों से न जाने कितने परिवारों के जीवन में रोशनी आई। उनके अपने परिवार के अधिकतर लोगों ने अलीगढ़ से शिक्षा प्राप्त की है। आज बड़ी संख्या में विद्यार्थी अलीगढ़ से शिक्षा प्राप्त करके इंजीनियरिंग और सिविल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। यह सब सर सैयद के अकेले दृष्टिकोण और दूरदर्शिता का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि हमारा कर्तव्य है कि हम इस मिशन में अपना योगदान देते रहें। भले ही हमारा योगदान छोटा हो, लेकिन हमें सहयोग अवश्य करना चाहिए। आज ज़ेन-ज़ी का दौर है। युवा पुस्तकें नहीं पढ़ते। मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं है। इसलिए उन्हें पुस्तकें अवश्य पढ़नी चाहिए।

कार्यक्रम में प्रोफेसर जमाल अहमद सिद्दीक़ी, डॉ. अलका वशिष्ठ, मौलाना सैयद नायाबुद्दीन नायाब, असरारुल हक़ इसरा, शादाँ फलावदवी, डॉ. फ़रहा नाज़, सैयदा मरियम इलाही, मौलाना जिब्राईल, इलमा नसीब, सुमति सिंह, मोहम्मद नदीम, नगर के गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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