-जज बोले - सिर्फ काट डालना ही जघन्य नहीं, सात वचनों को तोड़ना भी रेयरेस्ट ऑफ रेयर
लियाकत मंसूरी
नित्य संदेश, मेरठ। पति की हत्या कर लाश पर सांप छोड़ने के सनसनीखेज मामले
में एडीजे-12 कोर्ट ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने मृतक अमित
कश्यप की पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है। वारदात के
547 दिन बाद आए इस फैसले के साथ ही मेरठ कोर्ट ने 3 दिन में 4 हत्यारों को मौत की
सजा सुनाई है। इससे पहले 14 अक्टूबर को नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल
को फांसी सुनाई गई थी।
शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे एडीजे-12 जयवीर सिंह नागर की कोर्ट में सजा पर बहस
शुरू हुई। रविता और अमरदीप को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जोड़ा गया। जेल की वीसी
में रविता भूरे रंग के सूट और अमरदीप सफेद शर्ट में था। दोनों काफी घबराए हुए थे। सजा
से पहले जज ने दोनों से पूछा - तुम दोनों को हत्या का दोषी ठहराया गया है, क्या
सजा चाहते हो? इस पर रविता ने कहा - "मेरे 3 छोटे-छोटे बच्चे हैं। उनका ख्याल
रखा जाए।" और चुप हो गई। अमरदीप बोला - "मेरे मां-बाप बूढ़े हैं। उनकी
सेवा करने वाला कोई नहीं है। उनकी देखभाल में कोई कमी न रहे।" इसके बाद दोनों
फूट-फूट कर रोने लगे। अभियोजन पक्ष से एडीजीसी फरजाना मकसूद ने मृत्युदंड की मांग
की। करीब 30 मिनट की बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया और फिर फांसी की
सजा सुना दी।
जज की सख्त टिप्पणी - पेन तोड़कर फेंका
फैसला 131 पन्नों का था। जज ने नीले ड्रम हत्याकांड का नाम लिए बिना कहा -
"केवल काट डालना ही जघन्य अपराध नहीं है।" जज ने फैसले में भारतीय
संस्कृति, मनुस्मृति, रामायण-महाभारत और सती सावित्री का जिक्र किया। उन्होंने कहा
-"भारत में पत्नी पति की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत करती है,
सावित्री ने यमराज से लड़कर सत्यवान के प्राण बचाए थे। लेकिन यहां पत्नी ने ही
प्रेमी के साथ मिलकर पवित्र रिश्ते और शादी के सात वचनों को तोड़ दिया। यह माफी
लायक नहीं है।" कोर्ट ने कहा कि रविता और अमरदीप ने सिर्फ शरीर नहीं,
बल्कि आत्माओं के टुकड़े किए हैं। इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए जज ने सजा
सुनाने के बाद पेन तोड़ दिया। फैसले में कोर्ट ने मेरठ के दो अन्य चर्चित मामलों -
दामिनी-अतुल केस और इल्मा-तालिब केस का भी जिक्र किया, जहां हत्या को सांप से डसना
और हार्ट अटैक दिखाने की कोशिश की गई थी।
वो 3 सबूत, जिनसे खुली पोल
यह केस पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। अभियोजन ने 12 गवाह
पेश किए। सपेरे ने कोर्ट में बताया कि अमरदीप ने देवी जागरण में पूजा के नाम पर
उससे 1000 रुपये में सांप लिया था। वह बूढ़ा घोड़ा पछाड़ सांप था, जिसके दांत ही
नहीं थे। उससे मौत संभव ही नहीं थी। अमित के शरीर पर सांप के 10 निशान थे, लेकिन
पोस्टमॉर्टम में जहर नहीं मिला। चेहरे और हाथों पर खरोंच के निशान थे और मौत गला
घोंटने से दम घुटने से हुई थी। जिस नंबर से दोनों बात करते थे, वह अमरदीप के नाम
पर नहीं था। हत्या से 24 घंटे के अंदर दोनों में 65 बार बात हुई थी। 6 महीने में
2000 से ज्यादा कॉल और वॉट्सएप कॉल की डिटेल मिली।
क्या थी पूरी वारदात
अमित कश्यप बहसूमा थाना क्षेत्र के गांव अकबरपुर सादात का रहने वाला था।
अमरदीप उसके साथ टाइल्स-पत्थर लगाने का काम करता था, इसी दौरान उसका अमित के घर
आना-जाना हुआ और रविता से अफेयर हो गया। 17 अप्रैल 2025 की रात रविता ने पति के
सोने के बाद प्रेमी को घर बुलाया। दोनों ने मिलकर गला घोंटकर अमित की हत्या कर दी
और हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के लिए बिस्तर पर पहले से खरीदा हुआ
सांप छोड़ दिया। सुबह परिजनों ने सांप देखा तो सपेरे को बुलाकर पकड़वाया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद शक गहराया तो पुलिस ने रविता को हिरासत में लिया, उसने
जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने 60 दिन में चार्जशीट दाखिल की। 551 दिन में 87
तारीखें पड़ीं और 7 अक्टूबर को दोनों को दोषी करार दिया गया।
परिवार बोला - आखिर इंसाफ मिला
फैसले के बाद अमित की मां मुनेश देवी और भाई सोनू, संदीप कोर्ट में मौजूद थे। मां
मुनेश ने रोते हुए कहा - "हमें इंसाफ मिला। अब मैं जैसे भी होगा, उसके तीनों
बच्चों को पालूंगी।" भाई सोनू ने कहा - "अगर आरोपी हाईकोर्ट जाएंगे तो
हम भी अंत तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।" डीजीसी केके चौबे ने कहा - "मेरठ
क्रांति की भूमि है। अब यहां की न्यायपालिका अपराधियों को कड़ा संदेश दे रही है।
शव के टुकड़े करना ही नहीं, भरोसे और रिश्तों को तोड़ना भी जघन्य है।"
अब क्या होगा
जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि फैसले की
कॉपी मिलते ही दोनों को सजायाफ्ता बैरक में शिफ्ट कर दिया जाएगा। फिलहाल दोनों
पुरानी बैरक में हैं और फैसले के बाद से लगातार रो रहे हैं।

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