नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2021 में भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित यह स्मृति दिवस हमें उस ऐतिहासिक त्रासदी की याद दिलाता है, जब देश के बंटवारे के कारण लाखों परिवारों को अपना घर-बार, अपनों को और सब कुछ पीछे छोड़कर अकल्पनीय कष्टों का सामना करना पड़ा था। यह दिन न केवल उन पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, बल्कि नई पीढ़ी को यह समझाने का भी माध्यम है कि सामाजिक सद्भाव, एकता और बंधुत्व की रक्षा करना कितना महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर कॉलेज स्तर पर फिल्म 'पिंजर' का प्रदर्शन किया गया। फिल्म प्रदर्शन के बाद उपस्थित सभी लोगों ने विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले लोगों और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उप प्राचार्य डॉ. ज्ञानेश्वर टांक ने कहा कि राष्ट्र के विभाजन के कारण अपनी जान गंवाने वाले और अपनी जड़ों से विस्थापित होने वाले सभी लोगों को उचित श्रद्धांजलि के रूप में सरकार ने हर साल 14 अगस्त को उनके बलिदान को याद करने के दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। इस तरह के दिवस से वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को विभाजन के दौरान लोगों द्वारा झेले गए दर्द और पीड़ा की याद रहेगी।
एस.वी.बी.पी. चिकित्सालय के प्रमुख अधीक्षक डॉ. धीरज बालियान ने कहा कि स्वतंत्रता की मिठास के साथ-साथ देश को विभाजन का आघात भी सहना पड़ा। नए स्वतंत्र भारतीय राष्ट्र का जन्म विभाजन के हिंसक दर्द के साथ हुआ, जिसने लाखों भारतीयों पर पीड़ा के स्थायी निशान छोड़े। विभाजन मानव इतिहास के सबसे बड़े विस्थापनों में से एक है, जिससे लगभग 20 मिलियन लोग प्रभावित हुए। लाखों परिवारों को अपने पैतृक गांवों, कस्बों और शहरों को छोड़कर शरणार्थी के रूप में नया जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उक्त कार्यक्रम मेडिकल कॉलेज की फिल्म सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. अनामिका शर्मा के नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में फिल्म सोसाइटी के उपाध्यक्ष डॉ. अमित गर्ग, सदस्य डॉ. कृतेश मिश्रा, डॉ. दीपाली मित्तल, डॉ. नितिका, डॉ. हिमानी सहित सभी संकाय सदस्यों ने अपनी आजादी का जश्न मनाते हुए एक कृतज्ञ राष्ट्र के रूप में मातृभूमि के उन बेटे-बेटियों को भी नमन किया, जिन्हें हिंसा के उन्माद में अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी।

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