नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। शास्त्रीनगर में कथाव्यास
प्रो. पूनम लखनपाल ने प्रो. सुधाकराचार्य त्रिपाठी की प्रेरणा से अपने निज निवास पर
सामवेद की नवमी कथा के प्रथम दिन सप्तम एवं अष्टम प्रपाठक की कथा का शुभारंभ किया।
कथा में आज 'अञ्जते व्यञ्जते समञ्जते क्रतुं रिहन्ति मध्वाभ्यञ्जते' मंत्र का गुंजार हुआ। प्रो. पूनम ने बताया कि सामवेद पुनर्जन्म के गूढ़ रहस्य को प्रकट करने के साथ-साथ दिनचर्या जैसे सामान्य प्रतीत होने वाले किन्तु महत्वपूर्ण विषय का भी प्रतिपादन करता है। सप्तदिवसीय नवमी कथा में दिनचर्या विषय पर चर्चा की जाएगी। कथा में इन्द्र, पवमान सोम, अग्नि और विश्वदेवा देवताओं से संबंधित मंत्रों द्वारा दिनचर्या पर प्रकाश डाला गया। डॉ. पूनम ने श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित बारह आदित्य और सप्तगणों को चित्रों के माध्यम से स्पष्ट किया।
उन्होंने
बताया कि बारह आदित्यों और उसकी बारह संक्रांतियों के कारण चैत्र, वैशाख आदि बारह मासों
का स्वरूप है। सप्तम प्रपाठक के प्रथमार्ध के मंत्रों में आए पद जैसे अरुषी, ईशान,
सविता, सूर्य, रत्न, मणि, वरेण्य आदि को समझाते हुए दिनचर्या से जोड़ा गया। विविध मंत्रों,
स्तुतियों का गान किया गया, जिसमें उपस्थित श्रोताओं ने भी अपना स्वर मिलाया।

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