नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग एवं सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी, एनसीईआरटी नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलवार को हुआ। 12 से 14 अगस्त तक चलने वाले इस कार्यक्रम का विषय "शिक्षकों, शिक्षक-प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा उभरती हुई प्रौद्योगिकियाँ" है।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को एआई, ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना और उनकी डिजिटल दक्षता को विकसित करना है। कार्यक्रम के लिए 140 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें से पहले दिन 90 से अधिक ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलसचिव प्रो. भूपेंद्र सिंह रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में शोध निदेशालय के निदेशक प्रो. बीरपाल सिंह उपस्थित रहे। इस अवसर पर एनसीईआरटी से कार्यक्रम समन्वयक प्रो. शिरीष पाल सिंह, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार शर्मा, प्रो. अरुण कुमार, डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल, डॉ. वैभव शर्मा सहित कई शिक्षाविद मौजूद रहे।
प्रथम सत्र में एनसीईआरटी के प्रो. टागरम कोंडाला राव ने शिक्षा में राष्ट्रीय डिजिटल पहलों की जानकारी दी और कहा कि तकनीक आधारित शिक्षण आज समय की जरूरत है। प्रो. शिरीष पाल सिंह ने ई-सामग्री विकास के पांच आयामों - विकास, संग्रहण, वितरण, पहुंच और मूल्यांकन पर प्रकाश डाला। एनसीईआरटी की डॉ. रुचि द्विवेदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संवर्धित बुद्धिमत्ता में अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि एआई का उद्देश्य मानवीय क्षमताओं को खत्म करना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाना है। एआई शिक्षकों की जगह नहीं लेता, बल्कि उनके कार्य को अधिक सटीकता और दक्षता से करने में मदद करता है।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षा विभाग के डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। प्रथम दिवस का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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