नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। शुभम करोति फाउंडेशन द्वारा शनिवार को प्रातः 10:30 बजे से 12:30 बजे तक पंचवटी कॉलोनी, मवाना रोड स्थित आभा मानव मंदिर के प्रांगण में गोस्वामी तुलसीदास जयंती के पावन अवसर पर चल रहे रामचरित मानस ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस की कथा सम्पन्न हुई।
कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कथाव्यास महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती द्वारा आश्रम परिसर में ध्वजारोहण किया गया। राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत के पश्चात स्वामी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि बाह्य आक्रांताओं से तो हमें आजादी मिल गई, परन्तु मन के कुविचारों और दुर्व्यसनों से स्वतंत्रता अभी प्राप्त करनी शेष है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने गीता और रामायण से प्रेरणा प्राप्त की थी। राम राज्य में प्रजा में दैहिक, दैविक और भौतिक ताप नहीं था, आपस में द्वेष नहीं था, त्याग का भाव था। एक वर्ग अपने हित के लिए दूसरे वर्ग का अहित नहीं करता था, सभी वैदिक संस्कृति का अनुशीलन करते हुए अपने-अपने कर्तव्यों को पूर्ण निष्ठा से करते थे। हमारा देश पहले भी सम्पन्न था और अनेकों आक्रमणों और लूट के बाद अब भी सम्पन्न है। हमें अपने अमर शहीदों के बलिदान के प्रति कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए।
रामचरित मानस के बालकाण्ड पर तात्विक प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि सांसारिक व्यवहार और कुसंग का दुष्प्रभाव अंतर्मन पर गहरा होता है। कुसंग किसी भी प्रकार का हो, उसका त्याग आवश्यक है। भगवान की त्रिगुणात्मक माया से देवता और ऋषि-मुनि भी भ्रमित हो जाते हैं। शरणागत होने पर भगवान भक्त के मोह का संवरण करते हैं, केवल निष्पाप भगवत आश्रित भक्त ही माया से तरते हैं। गुरु की अवमानना करके इष्ट की प्राप्ति असंभव है। ईश्वर को अभिमान से द्वेष है। कामना और क्रोध आवेगात्मक हैं, हमेशा नहीं रहते, उनके वेग को सहन कर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। व्यास पूजन खजान सिंह चौहान, मीना गुप्ता एवं उषा प्रभात ने किया। इस अवसर पर सुरेश चंद गोविल, आभा गोविल, ब्रह्मपाल सिंह, कमलेश चौधरी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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