नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। शुभम करोति फाउंडेशन के तत्वावधान में आज शुक्रवार को प्रातः 10:30 से 12:30 बजे तक पंचवटी कॉलोनी, मवाना रोड स्थित आभा मानव मंदिर के प्रांगण में गोस्वामी तुलसीदास जयंती के पावन अवसर पर चल रहे श्री रामचरित मानस ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस की कथा संपन्न हुई।
कथा में महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी महाराज ने रामचरितमानस के बालकाण्ड पर तात्विक प्रवचन देते हुए कहा कि तत्वनिष्ठा होने के पश्चात भगवद् कथा और अधिक रसमयी लगने लगती है। भगवत् साक्षात्कार अंतर्मन में होता है। सत्संग के द्वारा साधक के प्रमेयगत (साध्य संबंधी) और प्रमाणगत (साधन संबंधी) संशय दूर होते हैं। लक्ष्य की प्राप्ति में और प्राप्ति के पश्चात भी गुरु की आवश्यकता बनी रहती है।उन्होंने कहा कि भगवान की लीलाएं भक्त के हित का उपदेश देने के लिए होती हैं। भगवान राम का चरित्र अनुकरणीय है, जबकि भगवान कृष्ण का संदेश यानी गीता अनुकरणीय है। नारद मोह प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए महाराज श्री ने कहा कि भक्त को हनुमान जी की भांति प्रशंसा और स्तुति से सावधान रहना चाहिए। अहंकार का छोटा सा बीज बाद में वटवृक्ष का रूप ले लेता है। संसार की माया अच्छे से अच्छे साधक को भी मोहग्रस्त कर देती है। कर्मकांडपरक साधना में अहंकार के स्फुरित होने की संभावना रहती है। यदि प्रशंसा हो तो साधक को इसे इष्ट एवं गुरु की कृपा मानना चाहिए। ज्ञान-विज्ञान से रहित जीव मोह में फंस जाता है। जितनी अधिक साधना, उतनी ही अधिक सावधानी रखनी चाहिए। भगवान से जुड़ी बुद्धि ही सुमति है। इस अवसर पर व्यास पूजन माया खंडेलवाल, सुधा सिंघल एवं सीता रानी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सुरेश चंद गोविल, आभा गोविल, कुणाल दीक्षित, पूरन चंद शर्मा, खूबचंद सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

No comments:
Post a Comment