दुरंत पाप-ताप हारि सर्वजंतु शर्मदे,
त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे।
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। गीता के श्लोकों का शुद्ध उच्चारण करते बच्चे गले में रुद्राक्ष की माला, सर पर तिलक, तो कोई धोती कुर्ता पहनकर कंधे पर दुपट्टा डालकर श्लोक का उच्चारण कर रहा था तो कोई स्कूल ड्रेस में अपने स्कूल के नाम को रोशन करते हुए गीता श्लोक का पाठ कर रहा था और श्रोता के रूप में उपस्थित विद्यार्थी एवं गणमान्य जन से तालियों की आवाज से अपना उत्साहवर्धन होते देख संस्कृत में लयबद्ध उच्चारण करते प्रतिभागी काफी उत्साह से श्लोक बोल रहे थे मौका था देवी अहिल्या के 231 वे पुण्य स्मरण पर कार्यक्रमों की श्रृंखला में आयोजित संस्कृत श्लोक पाठ प्रतियोगिता का प्रतियोगिता इंदिरा विद्या मंदिर वासुदेव बाग मानिक बाग रोड पर आयोजित की गई थी।

अष्टादश पुराणेषु व्यास्य वचन द्वयं परोपकारः पुण्याय पापाय परपीणम
उत्सव समिति के प्रमुख कमलेश नाचन एवं दिनेश शिंत्रे ने बताया की प्रतियोगिता को तीन भाग में बांटा गया था पहली से पांचवी तक जिसमें पांच सुभाषित श्लोक सुनाने के लिए 5 मिनट दिए गए थे द्वितीय भाग में छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थी ने नर्मदा अष्टकम का पाठ किया तो तृतीय भाग में नवी से 12वीं कक्षा के विद्यार्थी ने गीता के 15 वे अध्याय के प्रथम 15 श्लोक का पाठ किया।

संयोजक वीणा वर्मा एवज भंडारे किरण शर्मा एवं शुभांगी कांटे सुनील लाहौर ने बताया कि कक्षा पहली से पांचवी तक के छोटे-छोटे विद्यार्थियों ने जिस अंदाज में और उतार-चढ़ाव के साथ श्लोक का उच्चारण किया वह देखने लायक था।


जानकारी देते हुए अहिल्या उत्सव समिति के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक डागा एवं सचिव सरयू वाघमारे बताया कि कक्षा पहली से पांचवी तक के 34 विद्यार्थी छठी से आठवीं तक के 44 विद्यार्थी एवं नवी से 12वीं कक्षा के 40 विद्यार्थी इस प्रतियोगिता में शामिल हुए ।अतिथि के रूप में डॉ अशोक सचदेवा प्राचार्य जीडीसी कॉलेज, श्रीमती वंदना नाफड़े संस्कृत महाविद्यालय सहायक प्राध्यापक, श्रीमती अनीता शाह प्राचार्य इंदिरा विद्या मंदिर एवं कंचन गिद्वानी क्षेत्रीय पार्षद एवं शास्त्री जी शामिल हुए। निर्णायक के रूप में डॉक्टर मांगीलाल चौहान, डॉक्टर कुंवर सिंह मुजाल्दा, अजीता पांडेय ,अरिणमा राजूरकर गिरीश व्यास आलोक जोशी थे।

पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इस स्पर्धा के लिए मौजूद रहकर बच्चों को प्रोत्साहित किया और संस्कृत का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करने की सलाह दी। स्वागत सुधीर देगडे, स्मिता हारडीकर, लोकेंद्र वर्मा, लीना अग्रवाल, सीमा वीरांगनकर, शिवानी शर्मा, मधु सेठिया, सीमा कंडेरी ने किया एवं स्मृति चिन्ह निलेश केदारे, ज्योति तोमर, विनीता धर्म अविनाश भांड, ज्योत्सना खर्राटे ने दिए एवं संचालन किरण शर्मा ने किया आभार प्रकाश पारबानी ने माना ने ।



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