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Sunday, August 16, 2026

मिट्टी के हुनर से मिलेगी रोजगार की राह, सरकार देगी दस लाख

 


-निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण में युवाओं को सिखाई जाएगी मिट्टी से कलाकारी

लियाकत मंसूरी

भास्कर ब्यूरो, मेरठ। मिट्टी से बने बर्तनों और सजावटी सामान की कला अब युवाओं के लिए रोजगार का जरिया बन रही है। योगी सरकार युवाओं को पारंपरिक माटीकला से जोड़कर उन्हें हुनरमंद और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। इस कड़ी में उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड की ओर से युवाओं केा 15 दिवसीय आवासीय शिल्पकारी प्रशिक्षण दिया जाएगा। खास बात यह है कि प्रशिक्षण पूरी तरह निशुल्क होगा। प्रतिभागियों के रहने और खाने की व्यवस्था भी मुफ्त रहेगी। इसके साथ ही प्रशिक्षण अवधि में 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय भी दिया जाएगा।


प्रशिक्षण में युवाओं को सिर्फ मिट्टी के सामान्य बर्तन बनाना ही नहीं सिखाया जाएगा, बल्कि बदलते बाजार और ग्राहकों की पसंद के अनुरूप आधुनिक उत्पाद तैयार करने में भी दक्ष बनाया जाएगा। मिट्टी का फ्रिज, मिट्टी का कुकर, मिट्टी के अन्य बर्तन, विभिन्न सजावटी वस्तुएं तैयार करने के साथ ही मिट्टी के उत्पादों पर आकर्षक पेंटिंग, उनकी गुणवत्ता बढ़ाने और उत्पादों में सुधार करने के गुर भी सिखाए जाएंगे। योजना के तहत मेरठ जिले के युवाओं को पहले भी प्रशिक्षण का लाभ मिल चुका है। पिछले वर्ष जिले से 15 लोगों को माटीकला का प्रशिक्षण प्रदान किया गया था। इस बार भी युवाओं को पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरतों से जोड़ने का अवसर मिलेगा। इससे मिट्टी के काम से जुड़े परिवारों के साथ-साथ नए युवा भी इस क्षेत्र में अपना रोजगार शुरू कर सकेंगे।


हुनर के बाद कारोबार के लिए सरकार देगी सहारा

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद युवाओं को केवल प्रमाणपत्र देकर छोड़ने के बजाय उन्हें अपना काम शुरू करने के लिए आर्थिक मदद भी दी जाएगी। उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड के माध्यम से पात्र युवाओं को 10 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान है। ऋण पर 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी दी जाएगी। इससे युवा अपने स्तर पर माटीकला की इकाई स्थापित कर सकेंगे और दूसरों को भी रोजगार देने की स्थिति में पहुंचेंगे।


हुनर को रोजगार से जोड़ना है उद्देश्य

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने बताया कि माटीकला हमारी पारंपरिक कला के साथ रोजगार का भी मजबूत माध्यम है। योजना का उद्देश्य युवाओं को इस कला में प्रशिक्षित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। 15 दिवसीय प्रशिक्षण पूरी तरह निशुल्क होगा और प्रशिक्षणार्थियों के रहने-खाने की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्हें 250 रुपये प्रतिदिन मानदेय भी मिलेगा। प्रशिक्षण के बाद अपना व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक युवाओं को माटीकला बोर्ड की योजनाओं के माध्यम से ऋण और सब्सिडी का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा। योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है।

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