गोरखपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ,गोरखपुर के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग में प्रोफेसर सतीश चंद्र मित्तल शोध संस्थान , गोरक्ष प्रांत तथा अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, गोरक्ष प्रांत के संयुक्त सहयोग से "भारतीय इतिहास- लेखन में नवीन प्रवृत्तियां एवं चुनौतियां" विषय पर एकदिवसीय विद्वत व्याख्यान का आयोजन 13 अगस्त, 2026 को किया गया। इस विद्वत आयोजन का उद्देश्य, भारतीय इतिहास -लेखन की नवीन प्रवृत्तियां, उभरती शोध पद्धतियों तथा इतिहास के पुनर्लेखन से संबंधित समकालीन चुनौतियों पर विद्वत- विमर्श को प्रोत्साहित करना था।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडे जी ने अपने संबोधन में कहा कि, इतिहास- लेखन की दृष्टि भारतीय चेतना ,सांस्कृतिक मूल्यों, जीवन दृष्टि एवं राष्ट्रीय आदर्श के अनुरूप होना चाहिए ।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के इतिहास का पुनर्लेखन लेखन उसकी अपनी सभ्यतागत दृष्टि,परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासतों को केंद्र में रखकर किया जाना समय की महत्वपूर्ण उपादेयता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. राजवंत राव ने कहा कि इतिहास केवल अतीत की गाथा नहीं है, बल्कि यह भविष्य का मार्गदर्शक है। उन्होंने युवा शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर इतिहास का पूरी तरह वैज्ञानिक, तथ्यपरक और निष्पक्ष अध्ययन करें। इस अकादमिक संगोष्ठी में प्राचीन इतिहास,पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग की अध्यक्ष प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी ने अतिथि सत्कार के उपरांत अपने विचार साझा किया।
विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सत्येन्द्र मिश्रा ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।उक्त कार्यक्रम के सफल संचालन एवं संयोजन में डॉ. विनोद कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक,शोधार्थी एवं विद्यार्थी सहित इतिहास संकलन समिति,गोरक्ष प्रांत के पदाधिकारी एवं सदस्यगण उपस्थित रहे।
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