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Monday, August 10, 2026

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा को ‘ज़ूमएक्स बिजनेस एक्सीलेंस अवार्ड–2026’ से किया गया सम्मानित



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एंड सोशल साइंसेज (एफ.ए.एस.एस.) के लिबरल आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज विभाग में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर एवं स्वामी विवेकानंद शोध पीठ की प्रोफेसर एवं संयोजिका प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा को उनके समर्पण, कर्मनिष्ठा, शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान उपलब्धियों, विद्यार्थी हितैषी दृष्टिकोण तथा समाज के प्रति सेवा भाव को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करते हुए ज़ूमएक्स मोशन पिक्चर्स एंड इवेंट्स द्वारा उन्हें "आउटस्टैंडिंग कंट्रीब्यूशन टू हायर एजुकेशन – ज़ूमएक्स बिजनेस एक्सीलेंस अवार्ड–2026" से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उन शिक्षाविदों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से शिक्षा एवं समाज में प्रेरणादायी योगदान देकर उत्कृष्टता की नई मिसाल स्थापित की हो।

यह प्रतिष्ठित सम्मान ज़ूमएक्स मोशन पिक्चर्स एंड इवेंट्स के संस्थापक एवं क्रिएटिव डायरेक्टर श्री अमित यादव द्वारा आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री पवन सिंह चौहान, सदस्य, उत्तर प्रदेश विधान परिषद (सीतापुर) एवं चेयरमैन, एस.आर. ग्रुप ने प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा को सम्मान-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर उनके उल्लेखनीय योगदान की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षाविद समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा के स्रोत होते हैं तथा उनकी उपलब्धियाँ नई पीढ़ी को उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।



प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा ने अपने शैक्षणिक जीवन में सदैव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध उत्कृष्टता, नवाचार, मूल्यपरक शिक्षा तथा विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है। उन्होंने न केवल अर्थशास्त्र विषय में उच्च स्तरीय अध्यापन एवं अनुसंधान को नई दिशा दी है, बल्कि अनेक शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर उन्हें शैक्षणिक एवं व्यावसायिक सफलता की ओर अग्रसर किया है। उनके नेतृत्व में अनेक शैक्षणिक गतिविधियों, शोध परियोजनाओं, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों तथा नवाचार आधारित कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया, जिससे विश्वविद्यालय की अकादमिक प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयाँ प्राप्त हुई हैं।

स्वामी विवेकानंद शोध पीठ की संयोजिका के रूप में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों, युवा जागरण, राष्ट्र निर्माण, चरित्र निर्माण, मानवीय मूल्यों एवं भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रचार-प्रसार हेतु अनेक प्रभावी कार्यक्रमों, व्याख्यानमालाओं, शोध संगोष्ठियों, कार्यशालाओं एवं जन-जागरूकता अभियानों का सफल संचालन किया है। उनके प्रयासों से विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता एवं राष्ट्रप्रेम की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के साथ-साथ प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा सामाजिक सरोकारों के प्रति भी समान रूप से प्रतिबद्ध रही हैं। समाज के विभिन्न वर्गों के उत्थान, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के व्यक्तित्व विकास, शिक्षा के प्रसार तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े अनेक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय सहभागिता रही है। उनका मानना है कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी साधन है। इसी विचारधारा के साथ वे निरंतर समाज सेवा एवं जनकल्याण के कार्यों में सक्रिय योगदान देती रही हैं।


इस सम्मान के अवसर पर प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा ने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न मानते हुए अपने विश्वविद्यालय, सहकर्मियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा अपने परिवार के सहयोग का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें शिक्षा, अनुसंधान एवं समाज सेवा के क्षेत्र में और अधिक समर्पण एवं निष्ठा के साथ कार्य करने की नई ऊर्जा एवं प्रेरणा प्रदान करेगा। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं, विशेषकर छात्राओं एवं महिलाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़कर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।

स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दी। विश्वविद्यालय परिवार ने विश्वास व्यक्त किया कि उनकी यह उपलब्धि न केवल संस्थान की प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सुदृढ़ करेगी, बल्कि युवा पीढ़ी, विशेषकर महिलाओं एवं शोधार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगी। शिक्षा, अनुसंधान और समाज सेवा के क्षेत्र में उनका सतत योगदान भविष्य में भी इसी प्रकार नई उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।

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