नवप्रवेशित विद्यार्थियों को दिए सफलता, अनुशासन और एआई के साथ कदमताल करने के मंत्र
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। बागपत रोड स्थित विद्या विश्वविद्यालय में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत एवं शैक्षणिक मार्गदर्शन के लिए ‘विद्याभारंभ-2026’ ओरिएंटेशन एवं अकादमिक इंडक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, पाठ्यक्रमों, नियमों, सुविधाओं तथा विभिन्न गतिविधियों से परिचित कराया गया। अतिथियों ने विद्यार्थियों को बदलते औद्योगिक एवं रोजगार परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को तैयार करने और तकनीकी कौशल के साथ उद्यमिता को अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना एवं विद्यागान के साथ हुआ। फैकल्टी ऑफ फार्मेसी के डीन डॉ. प्रेम शंकर मिश्रा ने मुख्य अतिथियों, विश्वविद्यालय पदाधिकारियों एवं नवागंतुक विद्यार्थियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में शून्य एआई के संस्थापक पारितोष शर्मा तथा आईबीएम के एवीपी सर्वजीत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर विद्या विश्वविद्यालय के चांसलर प्रदीप कुमार जैन ने कहा कि भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसमें तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ उद्यमिता और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग देश के विकास में करने का आह्वान किया। प्रो-चांसलर विशाल जैन कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि विद्यार्थी अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण रखते हुए ज्ञान, कौशल और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाएं। बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को निरंतर अपडेट करते हुए देश के विकास में सक्रिय योगदान दें।
पारितोष शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा, जब युवा स्टार्टअप और नवाचार के माध्यम से स्वावलंबी बनेंगे। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के कारण आने वाले समय में बाजार और कार्यक्षेत्र में बड़े बदलाव होने वाले हैं। जो युवा इन बदलावों के लिए तैयार होंगे, वे आगे बढ़ेंगे और जो बदलाव को स्वीकार नहीं करेंगे, वे पीछे छूट सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को एआई सीखने तथा बदलते समय के साथ अपने कौशल को लगातार विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए चुनौतियों के बीच बार-बार उठ खड़े होने का साहस जरूरी है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) हिरेन दोषी ने नवागंतुक विद्यार्थियों को सफलता के तीन मंत्र ‘ड्रीम, डेडिकेशन और डिसिप्लिन’ याद रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बड़ा सपना देखना चाहिए, उसे पूरा करने के लिए पूरी लगन और समर्पण के साथ मेहनत करनी चाहिए तथा अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अनुशासित जीवनशैली अपनानी चाहिए। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनके नए शैक्षणिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार विजय कुमार दुबे ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, उपलब्ध सुविधाओं एवं विभिन्न संस्थागत गतिविधियों की जानकारी दी। वहीं आईबीएम के एवीपी सर्वजीत सिंह ने विद्यार्थियों को तकनीकी क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों, नए कौशल सीखने और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं का परिचय सत्र आयोजित किया गया। इसके बाद आइस-ब्रेकिंग सेशन, मनोरंजक खेलों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को एक-दूसरे से परिचित होने और विश्वविद्यालय के नए वातावरण में सहज रूप से घुलने-मिलने का अवसर मिला। नवागंतुक विद्यार्थियों में विद्या परिवार का हिस्सा बनने को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन फैकल्टी ऑफ फार्मेसी की सहायक प्रवक्ता अनुष्का शर्मा ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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