नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। संसद में बुधवार को पेश लोकसभा प्राक्कलन समिति ने जहाँ सीबीएसई की परीक्षाओं को लेकर आशंका जताई है, वहीं डॉ. संजय जायसवाल की अध्यक्षता वाली प्राक्कलन समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) लागू होने के बावजूद 10वीं से 12वीं तक की कक्षाओं में नई किताबों की जगह पुरानी किताबों से पढ़ाई हो रही है। इसका ज्वलंत उदाहरण माध्यमिक शिक्षा परिषद् उप्र में भी देखने को मिलता है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद् (यूपी बोर्ड) में वर्ष 2026-2027 के सत्र में कक्षा 9 में पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कराई जा रही है, जबकि NCERT ने नई किताबें जारी कर दी थी। बोर्ड ने जल्दबाजी में वाहवाही लूटने के प्रयास में पुरानी किताब ही कोर्स में लगा दी। उल्लेखनीय है कि यूपी बोर्ड में NCERT की ओर से जारी पुस्तकों को ही पढ़ाया जाता है।
वरिष्ठ लेखक-सम्पादक शरद भटनागर ने सवाल उठाया है कि जब कक्षा 9 में अंग्रेजी की पुस्तक कावेरी', विज्ञान की पुस्तक 'अन्वेषण', गणित की पुस्तक 'गणित मंजरी' सत्र शुरू होने से पहले आ गई थीं तो यूपी बोर्ड को पुरानी पुस्तकें पाठ्यक्रम में लगाकर किसे लाभ देने की जल्दी थी। उन्होंने सुझाव दिया है कि नवीन शिक्षा सत्र से NCERT से तारतम्य बिठाकर नई पुस्तकें ही लगानी चाहिए जिससे विद्यार्थियों को CBSE के छात्रों के मुकाबले कहीं पिछड़ना न पड़े।
लोकसभा की प्राक्कलन समिति ने भी कहा है कि एऩईपी 2020 का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। नीति के अनुसार पाठ्यक्रम पुस्तकों और मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव होना चाहिए, लेकिन यूपी बोर्ड NCERT का अनुकरण करने के बाद भी उससे बहुत पीछे हैं। पुरानी किताबें और नई नीति के बीच तालमेल न होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा तैयारी प्रभावित हो रही है।

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