नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। 1857 के अमर क्रांतिनायक शहीद धनसिंह कोतवाल शोध संस्थान द्वारा वात्स्यायन बैंक्वेट हॉल, मेरठ रोड, बागपत में शहादत दिवस के अवसर पर भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, क्रांतिकारी परिवारों के वंशजों एवं नागरिकों ने सहभागिता कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ महिला प्रदेश संयोजिका शुगम सिंह धामा द्वारा राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत संकल्प वाचन के साथ कराया गया। उपस्थित सभी लोगों ने शहीदों के आदर्शों पर चलने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प लिया। इसके उपरांत ब्रह्माकुमारीज प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों की टीम ने बहन मीनू एवं उनकी सहयोगी बहनों के नेतृत्व में क्रांतिनायक धन सिंह कोतवाल के जीवन एवं नेतृत्व पर आधारित प्रेरणादायक नाट्य प्रस्तुति दी, जिसने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं क्रांतिनायक धन सिंह कोतवाल के प्रपौत्र तस्वीर सिंह चपराना ने अपने उद्बोधन में कहा कि 1857 की क्रांति एक विद्रोह नहीं थी, बल्कि भारत का प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम था, जिसके महानायक क्रांतिनायक धन सिंह कोतवाल थे। उन्होंने कहा कि धन सिंह कोतवाल ने अपने अदम्य साहस, दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति से अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी थी।
उन्होंने बताया कि 10 मई 1857 को क्रांति प्रारंभ होने के बाद 11 मई को क्रांतिकारी दिल्ली पहुँचे। इसके बाद 27 जून 1857 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक ऐतिहासिक क्रांतिकारी अभियान चलाया गया, जिसका नियोजन एवं संयोजन धन सिंह कोतवाल ने किया। ब्रजघाट पर गंगा का पुल बनाकर क्रांतिकारियों को दिल्ली पहुँचने का मार्ग दिया गया तथा बागपत, सहारनपुर एवं उत्तराखंड क्षेत्र में यमुना नदी के पुलों को तोड़कर अंग्रेजी सेना की सहायता को रोका गया। इस ऐतिहासिक अभियान में राव कदम सिंह, शहामल सिंह, चौधरी बदन सिंह, साहब सिंह, मनफूल सिंह, सूरजमल धामा, फतुवा गुर्जर, मेवाराम, अचल सिंह बिधूड़ी, ठाकुर गंगाबख्श सिंह, अल्लादिया, गुर गोसाई, गुलाब सिंह, मिट्ठन सिंह सहित अनेक क्रांतिकारियों ने योजनाबद्ध सहयोग देकर अंग्रेजों को करारी पराजय दी।
उन्होने कहा कि इन घटनाओं से बौखला गए अंग्रेजों ने धन सिंह कोतवाल एवं उनके साथियों को समाप्त करने के लिए विशेष खाकी रिसाला गठित किया, जिसमें आधुनिक हथियारों से लैस घुड़सवार सैनिक शामिल थे। इसी खाकी रिसाले ने 4 जुलाई 1857 को पाँचली खुर्द एवं आसपास के गाँवों पर हमला किया, जिसमें 400 से अधिक लोग मारे गए, 46 को गिरफ्तार कर लिए गए, सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया तथा 40 क्रांतिकारियों को फाँसी देकर कई दिनों तक पेड़ों पर लटकाया गया। उन्होंने कहा कि 1857 से 1867 तक अंग्रेजों ने भारतीयों पर अमानवीय अत्याचार किए और जिन्होंने भी स्वतंत्रता की बात की उन्हें गोली मार दी गई। आज शोध संस्थान उन सभी ज्ञात-अज्ञात लगभग एक करोड़ अमर क्रांतिकारियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रामपाल सिंह धामा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि 1857 के अमर क्रांतिनायक शहीद धन सिंह कोतवाल एवं उनके सभी क्रांतिकारी साथियों का बलिदान राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है। हमारा दायित्व है कि हम उनके गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाएँ तथा उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने गौरवशाली इतिहास का अध्ययन करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ। कार्यक्रम का संचालन शोध संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश सिंह धामा ने किया।
शोध संस्थान के वरीष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष महेन्द्र सिंह धामा ने सरकार के समक्ष चार सूत्रीय मांग प्रस्तुत की। कार्यक्रम में शोध संस्थान की राष्ट्रीय कार्यकारिणी, प्रदेश कार्यकारिणी, महिला प्रदेश कार्यकारिणी एवं नवगठित प्रदेश कार्यकारिणी का परिचय एवं सम्मान किया गया। साथ ही जनपद बागपत के क्रांतिकारी परिवारों के वंशजों का भी सम्मान किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष तस्वीर सिंह चपराना, संस्थापक निदेशक डॉ. उमेश कुमार पटेल, प्रो. देवेश शर्मा, चंद्रपाल सिंह चौहान, कैप्टन सुभाष चंद्र, चौधरी प्रदीप गुर्जर, इंजीनियर सुरेंद्र वर्मा, एडवोकेट जबर सिंह, सरदार सरबजीत सिंह कपूर, गुलबीर सिंह, संजीव नागर सहित राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित रहे।
प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश सिंह धामा, प्रदेश जनसंपर्क प्रमुख राजबल सिंह, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह धामा, प्रदेश उपाध्यक्ष सुभाष प्रधान, भोला सिंह, डॉ. चरण सिंह, सुरेंद्र सिंह भड़ाना, अहलकार सिंह नागर, पंचशील, चेतन सिंह धामा, सुशील गुर्जर सहित प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों का परिचय एवं सम्मान कराया गया।महिला प्रदेश कार्यकारिणी में डॉ. रजनी रानी संखधार, शुगम सिंह धामा, बृजेश सिंह, डॉ. मंजू देवी, कमलेश आर्य, एकता चौधरी, बबीता चौधरी, दीपा रावत, अलका पटेल, अंशिका एवं सरोजिनी आर्य का परिचय एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर जनपद बागपत के क्रांतिकारी परिवारों के वंशजों—मेवाराम, अचल सिंह बिधूड़ी, शहामल सिंह, मिठन सिंह, ठाकुर गंगाबख्श सिंह, अल्लादिया, बदन सिंह तोमर, लायक राम, मनफूल सिंह, साहब सिंह एवं सूरजमल धामा आदि के वंशजों का भी सम्मान किया गया।

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