नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में सोमवार को विश्व जूनोसिस दिवस के अवसर पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह दिवस प्रतिवर्ष 6 जुलाई को जूनोटिक (पशुजन्य) रोगों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
संगोष्ठी मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. योगिता सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। उन्होंने जूनोटिक रोगों के विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए चिकित्सकों और रेजिडेंट्स को इन बीमारियों के समय पर निदान एवं रोकथाम के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में नोडल अधिकारी डॉ. श्वेता शर्मा ने भी जूनोटिक रोगों से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार, प्रोफेसर डॉ. संध्या गौतम एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मेडिसिन विभाग के समस्त जूनियर रेजिडेंट्स ने भी सक्रिय भागीदारी की।
*जूनोटिक रोग क्या हैं?*
जूनोटिक रोग (Zoonotic Diseases) वे संक्रामक बीमारियां हैं जो पशुओं से मनुष्यों में और कभी-कभी मनुष्यों से पशुओं में भी संचारित हो सकती हैं। ये बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी अथवा फंगस के कारण होते हैं तथा प्रत्यक्ष संपर्क, दूषित भोजन-पानी, कीट-पतंगों (जैसे मच्छर, टिक) के काटने या पर्यावरण के माध्यम से फैल सकते हैं।
विशेषज्ञों ने संगोष्ठी में कुछ प्रमुख जूनोटिक रोगों की चर्चा की, जिनमें शामिल हैं:
- *रेबीज़* – संक्रमित कुत्ते, बिल्ली या अन्य पशुओं के काटने से फैलने वाला घातक वायरल रोग
- *लेप्टोस्पायरोसिस* – दूषित जल या मिट्टी के माध्यम से पशुओं के मूत्र से संक्रमण
- *ब्रुसेलोसिस* – अनपाश्चुरीकृत दूध या संक्रमित पशुओं के संपर्क से होने वाला रोग
- *एंथ्रैक्स* – संक्रमित पशुओं या उनके उत्पादों के संपर्क से फैलने वाला बैक्टीरियल रोग
- *एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू)* – पक्षियों से मनुष्यों में संचारित वायरल संक्रमण
- *निपाह वायरस* – चमगादड़ों से फैलने वाला घातक वायरल रोग, जिसके मामले भारत में भी सामने आए हैं
- *स्क्रब टाइफस* – माइट (कीट) के काटने से होने वाला बैक्टीरियल संक्रमण
विशेषज्ञों ने बताया कि हाल के दशकों में लगभग 60 प्रतिशत नए संक्रामक रोग जूनोटिक मूल के पाए गए हैं, जिसका मुख्य कारण वनों की कटाई, शहरीकरण और मानव-पशु संपर्क में वृद्धि है। इन रोगों की रोकथाम हेतु 'वन हेल्थ' (One Health) दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया गया, जिसमें मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़कर देखा जाता है। कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थित चिकित्सकों के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ तथा आमजन से स्वच्छता बनाए रखने, पशुओं के टीकाकरण एवं संदिग्ध लक्षणों पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की गई।

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